अल्मोड़ा। जिले में आपदा और मार्ग निर्माण के कारण 52 सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त चल रही हैं। विभाग सालों बाद भी इन नहरों को दुरुस्त नहीं करा सका है। इससे कई स्थानों पर काश्तकारों को खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। हालांकि विभाग आंशिक रूप से नहरों में पानी चला रहा है, लेकिन आए दिन नहरों से पानी लीकेज होने से काश्तकारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सिंचाई विभाग के अल्मोड़ा डिवीजन के अंतर्गत 112 नहरें हैं और 1284 हेक्टेयर में सिंचाई की जाती है। इनमें से 60 नहरों में पानी चल रहा है। स्रोतों के सूखने से 12 नहरों का विभाग ने परित्याग कर दिया है। आंशिक रूप से चल रही 40 नहरों में 13 नहरें सड़कों के निर्माण कार्य के दौरान मलबा गिरने से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि दैवीय आपदा से 27 नहरें क्षतिग्रस्त हैं। वहीं रानीखेत डिवीजन में विभाग के पास कुल 82 नहरें हैं।
इस डिवीजन में 2853.4 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की जाती है। 57 नहरों में पानी चल रहा है। स्रोत सूखने से विभाग ने आठ नहरों का परित्याग कर दिया है, जबकि पांच बंद पड़ी हैं। वहीं आपदा से 12 नहरें क्षतिग्रस्त हैं। वर्ष 2010 में आई आपदा से क्षतिग्रस्त यह नहरें अब तक ठीक नहीं कराई जा सकी हैं। बारिश नहीं होने पर काश्तकारों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।