अल्मोड़ा। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के शिक्षा संकाय के बीएड प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने नशाखोरी और युवा विषय पर परिसर में अध्ययनरत विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों से परिचर्चा की। पाया कि युवाओं को नशे का लती बनाने में माता-पिता की लापरवाही, गलत संगति और फिल्मेें देखना आदि मुख्य कारण हैं।
बीएड प्रथम सेमेस्टर के छात्रों परिचर्चा में जानकारी मिली कि युवाओं को विभिन्न प्रकार के नशों के बारे में संपूर्ण जानकारी है। नशे के दुष्परिणाम ज्ञात होने के बावजूद वह नशे की लत को छोड़ा नहीं पा रहे हैं। युवा शुरुआती दौर में नशा उत्सुकतावश करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले युवा शहरी क्षेत्र में रहने वाले युवाओं से बराबरी, उनके जैसा व्यवहार और अपने दोस्तों के समूह को और अधिक बढ़ाने के उद्देश्य से नशे के दलदल में फंसते चले जाते हैं। परिचर्चा में कई युवाओं ने बताया कि वह तनाव को कम करने के लिए नशा करते हैं।
नशे से जुड़े विज्ञापन देखना और फिल्मों में नशे का प्रदर्शन करना, अभिभावकों की लापरवाही भी युवाओं मेें बढ़ती नशाखोरी की बड़ी वजह है। परिचर्चा में सामने आया कि युवा खुद के निर्णय के आधार पर ही नशे के रास्ते को अपनातेे हैं। शुरुआती दौर में सिर्फ गुटखा को इस्तेमाल करते हैं। धीरे-धीरे नशे की लत इतनी अधिक बढ़ जाती है कि वह स्मैक, गांजा समेत विभिन्न प्रकार के नशों का सेवन करने लगते हैं। नशे से जब उन्हें बीमारियां घेरती हैं तो तब तक वह इसके आदी बन चुके होते हैं।
परिचर्चा में बीना तिवारी, पल्लवी पांडे, कामिनी, दीपा असवाल, रश्मि, भावना, लक्ष्मण सिंह, राजेश, संजय पांडे, कुलदीप सिंह, महेश सिंह, सूरज चंद्र, संजय, मनीष सिंह, ललित मोहन, हरि दत्त भट्ट, दिव्या जोशी, लक्ष्मी धपोला, बबीता दरियाल, संजीव पांडे, सुमिता चम्याल, मुकेश सिंह, हेम पांडे आदि शामिल थे।