फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ह्यूमन ट्रेफिकिंग कराने वालों को सबक देगा यह मामला

विज्ञापन
Court on Dengue
विज्ञापन
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में बिचौलियों के माध्यम से नाबालिग लड़कियों की अधिक उम्र वाले बाहरी लोगों के साथ शादी कराने के कई मामलों को देखते हुए विशेष सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा के इस फैसले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिस लड़की की कथित रूप से शादी करवाई जा रही थी उसकी उम्र तब 13 साल सात माह थी, जबकि अलीगढ़ निवासी कथित दूल्हा 38 साल का था। अदालत में इस बात के सबूत मिले हैं कि पहले से ही पड़ोस के गांव से अलीगढ़ में ब्याही गई एक महिला ने इस शादी में बिचौलिये की भूमिका निभाई।
विज्ञापन

जानकारी के मुताबिक इस चर्चित मामले में पाया गया कि दूल्हा पक्ष के पंडित बने बगल के बीना गांव के रहने वाले जगदीश राम के घर से ही लड़के वाले बारात लेकर खोला गांव लड़की के घर गए और जगदीश राम का बेटा देवेंद्र कुमार दुल्हन पक्ष का पंडित बन गया था। बताया गया है कि शादी कराने में दूल्हे के पंडित बने जगदीश राम की बेटी पुष्पा देवी की अहम भूमिका रही, जो पहले से ही अलीगढ़ में ब्याही है। शादी कराने पहुंचे लोग सबसे पहले उसी के संपर्क में आए। पुष्पा देवी ने पीड़िता के पिता राजन राम के साथ ही उसकी दादी सुंदरी देवी को पोती की शादी कराने के लिए राजी कर लिया। पुष्पा का पति मेघेंद्र सिंह भी शादी करवाने पहुंचा था। इस सबके बारे में सबूत मिलने के बाद अदालत ने जगदीश राम, उसके बेटे देवेंद्र कुमार और पुष्पा देवी उसके पति मेघेंद्र सिंह और पीड़िता की दादी सुंदरी देवी को 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई। जांच में यह बात भी सामने आई कि पीड़िता की मां भवानी देवी इस शादी के पक्ष में नहीं थी। इसीलिए अदालत ने उसे सिर्फ पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई। जांच में पीड़िता के पिता राजन राम की भूमिका संदिग्ध मानी गई है। यह भी बता दें कि किशोरी सदन में रह रही पीड़िता (कथित दुल्हन) ने बीते दिनों लिखित रूप से यह भी शिकायत की थी कि उसके पिता ने पूर्व में उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस मामले में पीड़िता के धारा 164 के तहत बयान भी हो चुके हैं। पॉक्सो इसकी अलग से सुनवाई चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें