अल्मोड़ा। वन विभाग में लंबे समय से बजट नहीं आ रहा है, जिससे लंबित पड़े विभिन्न योजनाओं का काम ठप है और मानव एवं वन्य जीव संघर्ष में घायल हुए लोगों और पशुपालकों को मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। जिससे करीब डेढ़ हजार पशुपालकों को विभाग से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सिविल सोयम और अल्मोड़ा वन प्रभाग दोनों में अब तक मुआवजे के लिए 1526 आवेदन आ चुके हैं।
अल्मोड़ा वन प्रभाग में 2015-16 में 227, 2016-17 में 559 और 2017-18 में 290 पशुपालकों को मुआवजा नहीं मिल सका है। सिविल सोयम में भी 2014 से पशुपालकों को मुआवजा नहीं मिला है। सिविल सोयम और अल्मोड़ा वन प्रभाग दोनों विभागों की बात करें तो अब तक मुआवजे के लिए 1526 आवेदन आ चुके हैं, लेकिन विभाग के पास बजट नहीं होने के कारण पशुपालकों को मुआवजा राशि नहीं मिल रही है।
नियमानुसार वन्य जीव संघर्ष में मारे गए गाय, बैल, भैंस के लिए वन विभाग द्वारा 15-15 हजार, बकरी के लिए तीन हजार, घोड़ा, खच्चर के लिए 40-40 हजार और मानव के मामूली घायल होने पर 15 हजार, गंभीर घायल को 50 हजार, अंग भंग होने पर एक लाख और मृत्यु होने पर तीन लाख मुआवजा दिया जाता है। मुआवजे मिलने की आस में हर रोज काफी संख्या में पशुपालक वन विभाग कार्यालय में ॅरोज पहुंच रहे हैं पर खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। डीएफओ आरसी शर्मा ने बताया कि किसी भी मद में पैसा नहीं आया है जिससे पशुपालकों का मुआवजा देने के अलावा अन्य योजनाओं पर भी काम नहीं हो पा रहा है। पैसा स्वीकृत होने पर ही धनराशि बांटी जा सकेगी।