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अल्मोड़ा में 43 बच्चे अति कुपोषण का शिकार

Thu, 30 Nov 2017 10:25 PM IST
अमित उप्रेती  अल्मोड़ा।
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malnutrition - फोटो : Demo Pic
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बाल स्वास्थ्य की चौंकाने वाली रिपोर्ट में जिले में जन्म से पांच साल तक के 43 बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं। एक माह में इन अति कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ी है। अक्तूबर तक यह संख्या 40 थी। यह भी तब जब केंद्र सरकार लगातार पिछले कुछ सालों से बच्चों को कुपोषण से दूर करने के लिए अभियान चलाए हुए है। स्थिति इतनी खराब है कि पिछले दो सालों में 65 बच्चों को हायर सेंटर देहरादून रेफर किया गया है। इनमें भी करीब 14 अति कुपोषित बच्चों की सर्जरी की जा चुकी है। 
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 गर्भवती महिला द्वारा सही पोषण नहीं लिए जाने, आर्थिक तंगी या फिर जन्मजात, कारण जो भी रहे हों जिले में 150 से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इससे भी भयानक स्थिति यह है कि इनमें भी 43 बच्चे अति कुपोषण का शिकार हुए हैं। यह संख्या अक्तूबर में 40 थी, लेकिन नवंबर में 43 पहुंच गई है। दो साल के आंकड़ों को देखें तो अति कुपोषित 65 बच्चों को हायर सेंटर देहरादून भेजा जा चुका है। इनमें भी विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त 14 बच्चों की सर्जरी की जा चुकी है।

मालूम हो कि कुपोषण और अति कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए प्रत्येक माह की पांच तारीख को ब्लॉक स्तर पर जांच की जाती है। रिपोर्ट मिलने के बाद बाल विकास विभाग अति कुपोषित बच्चों की लिस्ट राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य की टीम को देता है और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य की टीम प्रत्येक माह की 10 तारीख को इन बच्चों की फिर जांच करती है। डब्ल्यूएचओ के मानकों के अंतर्गत बच्चे का विकास नहीं होने पर टीम ऐसे बच्चों को अति कुपोषित घोषित करती है। जिसके बाद जिले के इंटरवेंशन सेंटर में बाल रोग विशेषज्ञों की टीम इन बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती है और अंतत: बेहतर इलाज के लिए अति कुपोषित बच्चों को हायर सेंटर देहरादून रेफर किया जाता है। जहां विशेषज्ञों की टीम द्वारा उनकी सर्जरी की जाती है। 
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 जिले में एक माह के भीतर अति कुपोषित बच्चे बढ़कर 43 हो गए हैं। सरकार ने अति कुपोषित बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषक तत्व दिए जाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे बच्चों को सिडकुल से एडीशनल सप्लीमेंट के तौर पर ऊर्जा फूड (हाई प्रोटीन आदि पोषक तत्व) और प्रिमिक्स खिचड़ी मंगाकर दी जा रही है।
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 पीएस बृजवाल, बाल विकास अधिकारी। 
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