भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। एकीकृत आजीविका परियोजना के तहत ग्रामीण महिला समूहों द्वारा उत्पादित जैविक सब्जी, मसालों और दालों आदि के विक्रय के लिए संचालित की गई हाट बाजार छह माह चलने के बाद बंद हो गई। अक्तूबर से हाट संचालित नहीं हो रही है। इधर लोगों ने इसे दोबारा शुरू करने की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा उत्पादित जैविक सब्जी, मिर्च, मसाले, पहाड़ी दालों और डेरी उत्पादों आदि का समूहों से जुड़ीं महिलाओं को उचित दाम दिलाने के उद्देश्य से नगर के रामलीला मैदान में आजीविका परियोजना की बीते वर्ष मई से प्रत्येक गुरुवार को हाट बाजार लगनी शुरू हुई थी।
हाट बाजार में लोग समूहों द्वारा उत्पादित सामान की खरीदारी करते थे, लेकिन यह हाट मई से सितंबर तक ही चली और घाटे का रोना रोकर इसे बंद कर दिया गया। आजीविका परियोजना कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस हाट बाजार से 74 महिला समूहों के 648 महिला काश्तकार सदस्य सीधे जुड़े हैं। प्रत्येक सदस्य को बीज, खाद, बुआई, कटाई, निराई आदि के लिए परियोजना की ओर से 3600 रुपये वार्षिक प्रोत्साहन के तौर पर दिया जाता है।
कुल वार्षिक खर्च 23 लाख से अधिक बैठता है। इसके अलावा परियोजना से जुड़े कर्मचारियों और प्रशिक्षण आदि पर भी काफी खर्च हो रहा है। जिससे हाट को आगे संचालित करना संभव नहीं हो पा रहा है। इधर पूर्व ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य दीपक बिष्ट, सभासद गोपालसिंह ने उत्पादन बढ़ाने और हाट दोबारा शुरू करने पर जोर दिया है। इधर आजीविका परियोजना के समन्वयक जयदेव द्विवेदी का कहना है कि समूहों के उत्पादन में गुणात्मक वृद्धि नहीं होने के कारण हाट बाजार बंद हुआ है।