अल्मोड़ा। जिले में जड़ी-बूटी उत्पादन कर काश्तकार आय अर्जित कर रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में जिले के काश्तकारों ने 336.36 क्विंटल जड़ी-बूटी का उत्पादन किया। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में 930 नाली भूमि में 30650 तेजपात और बड़ी इलायची के पौधों का रोपण किया गया है।
जड़ी-बूटी उत्पादन के लिए जिले की जलवायु मुफीद है। कृषि के साथ ही काश्तकार ग्रामीण इलाकों में जड़ी-बूटी की खेती भी कर रहे हैं। जिले में विभिन्न स्थानों पर काश्तकार तेजपात, रीठा, आंवला, गनियां, समेवा, सतावर, भृंगराज आदि की खेती से जुड़े हैं। चालू वित्तीय वर्ष में काश्तकारों ने 336.36 क्विंटल जड़ी-बूटी का उत्पादन किया है।
जिले में इस वर्ष 108 तेजपात, 10 क्विंटल रीठा, तीन क्विंटल हरड़, पंच क्विंटल बिच्छू घास, 9.5 क्विंटल आंवला, 157.50 क्विंटल किलमोड़ा, दो क्विंटल गनियां, पांच क्विंटल समेवा, 580 किलो सतावर, 25 किलो भृंगराज, एक क्विंटल तुलसी उत्पादित की है। जिससे कृषकों को 14.33 लाख रुपये की आय हुई है।
जिला भेषण सहकारी संघ के प्रभारी पंकज कुमार पंत ने बताया कि विभाग द्वारा जड़ी-बूटी शोध संस्थान गोपश्वर के माध्यम से पंजीकृत काश्तकारों को रमन्ना उपलब्ध कराया जाता है, रमन्ना प्राप्त होने के बाद काश्तकार देश में कहीं भी अपने उत्पादों को विपणन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में जिले में सल्ट ब्लॉक के पीनाकोट, कोठलगंव, ढूंगामोहान में 117 काश्तकारों के यहां 305 नाली भूमि में 24400 बड़ी इलायची के पौधे, जबकि सल्ट ब्लॉक को बौड़, तोल्यां, मिरई (ताकुला), डोल (लमगड़ा) में 161 काश्तकारों की 625 नाली भूमि में 6250 तेजपात के पौधों का निशुल्क रोपण किया गया है।