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...तो ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की इच्छुक नहीं सरकार

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अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सत्तारूढ़ रहीं सरकारें ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की घोषणाएं करती रही हैं, लेकिन जिले में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देकर अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई है। धौलछीना-वृद्ध जागेश्वर-जागेश्वर-झांकरसैम-धौलादेवी और धौलछीना-बिनसर-डीनापानी-पथरिया-कौसानी ट्रैकिंग रूट विकसित करने की योजना का प्रस्ताव लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित है। कांग्रेस के सत्ता से हटने के बाद भाजपा सरकार ने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
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वन विभाग के अधीन धौलछीना से वृद्ध जागेश्वर तक पुराना मार्ग है। यह मार्ग जंगल के बीच से होकर गुजरता है। मार्ग में कई स्थानों से हिमालय के मनोहारी दृश्य दिखाई देते हैं। इस प्राचीन मार्ग को वन विभाग का ट्रैकिंग रूट के रूप में विकसित कर ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। विभाग ने धौलछीना से वृद्ध जागेश्वर-जागेश्वर-झांकरसैम-धौलादेवी तक ट्रैकिंग रूट प्रस्तावित किया है। इसके अलवा दूसरा ट्रैकिंग रूट धौलछीना से बिनसर-डीनापानी-पथरिया होते हुए कौसानी तक बनाने का भी वन विभाग का प्रस्ताव था ताकि ट्रैकिंग रूटों को विकसित कर यहां पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।
दोनों मार्गों मेें कुछ निश्चित स्थानों पर ईको हट्स भी बनाने की योजना विभाग की थी, ताकि स्थानीय ग्रामीण भी पर्यटन से जुड़कर आय अर्जित कर सकें। सिविल सोयम वन प्रभाग ने दोनों ट्रैकिंग रूटों को विकसित करने के लिए पिछली सरकार को प्रस्ताव भेजा था पर शासन स्तर पर प्रस्ताव लंबित पड़ा है। कांग्रेस के सत्ता से हटने और भाजपा के सत्तारूढ़ होने के बाद भी इसके लिए शासन से धन अवमुक्त नहीं हुआ है।
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ईको टूरिज्म के रूप में दोनों ट्रैकिंग रूटों को विकसित करने की विभाग की योजना थी। इस संबंध में शासन को पूर्व में प्रस्ताव भी भेजा गया था, पर शासन स्तर से धन अवमुक्त नहीं होने पर योजना आगे नहीं बढ़ सकी है।
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आरसी शर्मा, प्रभागीय वनाधिकारी, सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा।
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