अल्मोड़ा। जीएसटी लागू होने के करीब सात माह बाद भी ग्राहकों को नियमों के तहत सामान खरीदने पर व्यवसायी बिल नहीं दे रहे हैं। जिसका नुकसान ग्राहकों को उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि करीब दो माह पहले 154 चीजों में जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया, लेकिन इन चीजों के दामों में कोई गिरावट नहीं आई है। वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बारे में शीघ्र जांच की जाएगी और जो व्यवसायी ग्राहकों को बिल उपलब्ध नहीं करा रहे हैं उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जीएसटी लागू हुए करीब सात माह बीत गए हैं, लेकिन इसके प्राविधान आज भी सही ढंग से लागू नहीं हो रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद 200 रुपये से अधिक कीमत का सामान खरीदने पर बिल देना जरूरी है लेकिन अधिकांश व्यवसायी आज भी लोगों को बिल उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। बहाना यह बनाया जाता है कि बिल लेने पर जीएसटी का अतिरिक्त भुगतान करना होगा जबकि नियमानुसार किसी भी चीज के दामों में जीएसटी पहले से ही जुड़ा रहता है और बिल देने से दामों पर किसी तरह का अंतर नहीं आ सकता है। दूसरी तरफ अधिकांश लोगों को सामान खरीदने पर बिल प्राप्त करने की आदत नहीं है। आपसी भाई चारे में भी वह दुकानदारों से बिल नहीं लेते, लेकिन वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिल नहीं लेने पर नुकसान ग्राहकों को हो रहा है। बीते दिनों सरकार ने 156 चीजों में जीएसटी 28 से घटाकर
18 प्रतिशत कर दी लेकिन इसका असर बाजार में नहीं दिखाई दिया।
इधर वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्राहकों को भी जागरूकता दिखानी चाहिए और सामान खरीदने के बाद बिल अवश्य मांगना चाहिए। क्योंकि बिल काटने पर व्यापारी निर्धारित से अधिक कीमत नहीं वसूल सकता और शिकायत मिलने पर संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस बारे में पूछे जाने पर सहायक आयुक्त वाणिज्य कर कमल किशोर जोशी का कहना है कि शीघ्र ही दुकानदारों के दस्तावेजों की जांच करके उनके द्वारा किए गए व्यापार और ग्राहकों को दिए गए बिलों की प्रतिलिपि आदि का निरीक्षण किया जाएगा। जो दुकानदार ग्राहकों को बिल उपलब्ध नहीं करा रहे हैं उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन व्यवसायियों ने नियमित रिटर्न नहीं भरा है उन्हें तत्काल यह प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए अन्यथा उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।