जिले के ग्रामीण क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा बदहाल है। जिले के लमगड़ा विकासखंड में 27 राजकीय प्राथमिक स्कूल एकल शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। एकमात्र शिक्षक के विभागीय कार्य अथवा अवकाश में रहने पर इन स्कूलों में व्यवस्था के तहत दूसरे स्कूलों से शिक्षक भेजे जाते हैं। कई बार व्यवस्था नहीं बन पाने पर स्कूल बंद रहते हैं। ऐसे में नौनिहालों के भविष्य के बारे में सोचा जा सकता है।
सरकार ने गांव-गांव में प्राथमिक स्कूल खोल दिए, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिरने से लोगों का इनसे मोह भंग हो रहा है। लमगड़ा विकासखंड में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक लमगड़ा ब्लॉक में राजकीय प्राथमिक विद्यालय पौधार, जसकोट, भटखोला, सिरौनिया, चायखान, कनरा, जाखनकाने, जाखतिवारी, गौलीमहर, दोघोडिया, मेरगांव, चौणा, भांगाद्योली, बैगनिया, बरगला, काईलेख, तलकोट, बांजधार, निरई, भाबू, ल्वाली, बस्टा, कालाडुंगरा, जैंती, लोहना, बाराकोट, टिकरचुपड़ा आदि स्कूल काफी लंबे समय से एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।
सरकारी स्कूल में कम फीस होने के बावजूद इन स्कूलों में भी छात्र संख्या लगातार कम हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह शिक्षा की गुणवत्ता में कमी है, क्योंकि वहां तैनात एकमात्र शिक्षक को कक्षा एक से पांचवीं तक की कक्षाओं को पढ़ाना पढ़ता है। इसके अतिरिक्त विभागीय कार्यों का बोझ भी रहता है। ग्रामीण इलाकों में जहां शिक्षक काफी कम हैं वहीं सुविधाजनक स्थानों में आज भी जरूरत से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं।