अल्मोड़ा। लोकसभा चुनाव की घोषणा से पूर्व जनवरी में दो जिलों में चुनाव ड्यूटी में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी को आखिरकार अल्मोड़ा से रिलीव होना पड़ा। क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी वाईएस रावत को अल्मोड़ा में लेखन सामग्री में और पिथौरागढ़ में कंट्रोल रूम का दायित्व सौंपा गया था, लेकिन पिथौरागढ़ में चुनाव ड्यूटी में कर्मचारियों की कमी को लेकर वहां के जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से अधिकारी को रिलीव नहीं किया गया। इस दौरान करीब एक महीने तक असमंजस की स्थिति बनी रही। मजबूरन संसदीय सीट के रिटर्निंग आफिसर को अधिकारी को अल्मोड़ा चुनाव ड्यूटी से रिलीव करना पड़ा।
लोकसभा चुनाव के लिए ड्यूटी निर्धारित होने के बाद पिथौरागढ़ में सेवायोजन अधिकारी और अल्मोड़ा में क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी के पद पर तैनात वाईएस रावत की दोनों जगहों पर चुनाव ड्यूटी लगाई गई थी। अल्मोड़ा में अधिकारी की ड्यूटी 19 जनवरी और पिथौरागढ़ में 23 जनवरी को लगाई गई। करीब एक माह तक दोनों जगहों पर चुनाव ड्यूटी होने के कारण असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। इस दौरान दोनों जिलों के जिलाधिकारी की ओर से एक दूसरे को पत्राचार किया जाता रहा।
संसदीय क्षेत्र के रिटर्निंग आफिसर की ओर से पिथौरागढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारी को कई बार पत्राचार कर अधिकारी को रिलीव करने के लिए भी कहा गया, लेकिन मूल तैनाती पिथौरागढ़ होने और वेतन भी पिथौरागढ़ से आहरित होने को आधार बनाते हुए पिथौरागढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारी ने वाईएस रावत को रिलीव नहीं किया। असमंजस की स्थिति को लेकर अमर उजाला में तीन फरवरी को प्रमुखता से खबर भी छपी थी।
इधर क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी वाईएस रावत ने बताया कि उन्हें अल्मोड़ा चुनाव ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया है। पिथौरागढ़ में उनको चुनाव ड्यूटी में कंट्रोल रूम का दायित्व सौंपा गया है।