अल्मोड़ा। एक तरफ ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को तराशने और खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड में नौ नवंबर से खेल महाकुंभ प्रस्तावित है, लेकिन जिले में खेल विभाग की स्थिति बदहाल है। जिला मुख्यालय में खेल विभाग संविदा पर रखे गए प्रशिक्षकों के सहारे चल रहा है। खेल विभाग में सिर्फ बैडमिंटन का ही नियमित कोच नियुक्त है। कई बार बजट कम होने की स्थिति में संविदा पर रखे गए प्रशिक्षकों की सेवा निर्धारित अवधि से पहले ही खत्म कर दी जाती है। ऐसे में खिलाड़ियों के प्रशिक्षण पर बुरा असर पड़ता है।
जानकारी के मुताबिक शासन स्तर पर इस वर्ष ग्रामीण खेलों (पायका) के स्थान पर प्रदेश में खेल महाकुंभ कराने का निर्णय लिया गया है। खेल महाकुंभ नौ नवंबर से प्रस्तावित है। वहीं जिले में खेल विभाग की स्थिति उत्तराखंड राज्य बनने के 17 सालों बाद भी नहीं सुधर सकी है। जिला मुख्यालय स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा स्पोर्ट्स स्टेडियम में टेबिल टेनिस, ताइक्वांडो, फुटबाल, हॉकी, बॉक्सिंग, क्रिकेट, एथलेटिक्स, बॉस्केटबॉल, कबड्डी, बैडमिंटन आदि खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन खेलों में करीब 300 से अधिक खिलाड़ी पंजीकृत हैं। जिन्हें स्थानीय स्टेडियम में नियमित अभ्यास कराया जाता है। स्थिति यह है कि काफी लंबे समय बाद भी खेल प्रशिक्षकों के पदों पर नियमित नियुक्ति नहीं हुई है। हालांकि खेल विभाग ने संविदा पर खेल प्रशिक्षक रखे हैं।
खेल विभाग में सिर्फ बैडमिंटन खेल में ही सरकारी प्रशिक्षक नियुक्त हैं बाकी सब में संविदा से काम चलाया जा रहा है। संविदा में रखे गए खेल प्रशिक्षकों का कार्यकाल 15 अप्रैल से 15 फरवरी तक रहता है। इस अवधि के दौरान ही खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। कई बार समय पर बजट नहीं मिलने पर खेल प्रशिक्षण शिविर विलंब से शुरू होते है। इससे खिलाड़ियों के प्रशिक्षण पर असर पड़ता है। कई बार स्थिति यह हो जाती है कि बजट की कमी के चलते प्रशिक्षकों का कार्यकाल निर्धारित अवधि सीमा से कम करना पड़ता है। इससे खिलाड़ियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।