अल्मोड़ा। मैदानी इलाकों की तरह पर्वतीय जिलों में भी करवाचौथ का प्रचलन काफी बढ़ गया है। इस दौरान बाजार में भी विभिन्न जगहों पर करवाचौथ से संबंधित पूजा सामग्री की खूब बिक्री होती है। पर्वतीय जिलों में वट सावित्री व्रत की मान्यता है, लेकिन पिछले कुछ सालों से नव विवाहिताएं करवाचौथ का व्रत भी रखने लगी हैं। कर्नाटकखोला निवासी हिमांशी अधिकारी बताती हैं कि वह पिछले तीन साल से करवाचौथ का व्रत रख रही हैं। उन्होंने बताया कि करवाचौथ के दिन वह निर्जला व्रत रखकर सुबह पूजा-अर्चना करती हैं।
उसके बाद मोहल्ले की महिलाओं के साथ सामूहिक पूजा पाठ और कथा में भाग लेती हैं। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले करवाचौथ को लेकर मान्यता है कि इस दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान गणेश, कार्तिकेय के अलावा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है। महिलाएं शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं पति की पूजा करती हैं और उसके बाद भोजन ग्रहण करती हैं।
करवा चौथ की पूर्व संध्या पर नगर के बाजार गुलजार
अल्मोड़ा। प्रेम का पर्व करवा चौथ कल रविवार को मनाया जाएगा। करवा चौथ से एक दिन पूर्व महिलाओं ने बाजार से पूजा सामग्री की खरीददारी की। पूरे दिन बाजार में काफी भीड़ रही। करवा चौथ को देखते हुए बाजार में नई डिजाइनों में चूड़ियां सजी हुई हैं। महिलाएं करवा चौथ पर विशेष श्रृंगार करती हैं।
करवा चौथ के एक दिन पूर्व महिलाओं ने बाजार से पूजा समेत सुहाग से जुड़ी सामग्री की खरीदारी की। चूड़ियों का पैकेट 200 से 500 रुपये की कीमत तक उपलब्ध है। गले का हार 500 से एक हजार रुपये कीमत में मिल रहा है। इसके अलावा सिल्क, कांजीवरम समेत कई नईसाड़ियां भी बिक्री के लिए लगाई गई हैं। शनिवार को महिलाओं ने बाजार से करवा, छलनी, थाली, लोटा, पट्टा, किताब, सीकें आदि पूजन सामग्री की खरीदारी की।