अल्मोड़ा बाजार में स्थानीय पटाल बिछाने की योजना अधर में
अल्मोड़ा। नगर पालिका परिषद की अल्मोड़ा के मुख्य बाजार में स्थानीय पटालें बिछाकर प्राचीन स्वरूप को बरराकर रखने की योजना है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसके लिए धन देने की भी घोषणा की थी, लेकिन पालिका परिषद को स्थानीय पटाल नहीं मिलने से यह योजना तीन साल बाद भी मूर्तरूप नहीं ले सकी है।
अल्मोड़ा नगर का मुख्य बाजार करीब डेढ़ किमी लंबा है। नगर के स्थापना के समय से ही पल्टन बाजार से मिलन चौक तक स्थानीय खानों की पत्थर की पटालें बिछाई गई थीं। पूर्व में पटालें कई स्थानों पर टूटकर खराब हो गई थीं। इसे देखते हुए पालिका ने करीब एक दशक पहले स्थानीय पटालों को हटाकर कोटा स्टोन बिछा दिया था। बाजार के ढलान वाले क्षेत्रों में कोटा स्टोन फिसलन भरा है। कोटा स्टोन में बारिश और पानी गिरने से बाजार में फिसलन बढ़ जाती है। कई लोग बाजार में फिसलकर घायल भी हो चुके हैं। नगरवासी लंबे समय से बाजार के परंपरागत स्वरूप को पुन: बरकरार रखने के लिए स्थानीय पत्थर की पटाले बिछाने की मांग कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने 10 सितंबर 2013 को खूंट आगमन पर नगर में पटाल मार्ग निर्माण की स्वीकृति दी थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी स्थानीय पत्थरों की पटालें बिछाने के लिए धन देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक बाजार में स्थानीय पत्थरों की पटालें नहीं बिछ पाई हैं। इधर पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने बताया कि स्थानीय पत्थरों की पटालें बिछाने के लिए दो बार पालिका परिषद ने निविदाएं आमंत्रित कर दी हैं, लेकिन स्थानीय पत्थर की पटालें उपलब्ध नहीं होने से योजना पर काम नहीं हो सका है।