भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। कृषि प्राविधिकी प्रबंधन अभिकरण द्वारा ब्लॉक सभागार में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में काश्तकारों को मशरूम उत्पादन की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि काश्तकार मशरूम उत्पादन कर आर्थिक रूप से समृद्ध बन सकते हैं।
प्रशिक्षण में इंडो-डच मशरूम परियोजना ज्योलीकोट के विशेषज्ञ सुरेंद्र सिंह और रमेश जोशी ने मशरूम उत्पादन की विधि बताई। उन्होंने कहा कि 14 से 18 डिग्री तापमान में मशरूम तीन माह में तैयार हो जाता है। पर्वतीय क्षेत्र के लिए बटन, ढींगरी, मिल्की प्रजाति का मशरूम मुफीद है। मशरूम में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन्स पाए जाते हैं, जो शरीर में रोग प्रतिरोधक का काम करते हैं।
कम बसा और कम कलोरी की वजह से डाइबीटिज के रोगियों लिए भी लाभदायक है। मशरूम की बाजार में मांग भी काफी अधिक है। प्रशिक्षण में मार्केटिंग, रोग और उपचार, देखभाल आदि की जानकारी भी दी गई। शिविर में सहायक खंड विकास अधिकारी आरएस अधिकारी, उद्यान प्रभारी प्रमोद राणा, सुरेंद्र सिंह, रमेश चंद्र जोशी, हरीश गोस्वामी, निर्मल बुदलाकोटी, देवेंद्र सिंह, गणेश भंडारी, श्याम असवाल, मोहन बिष्ट, ललित जोशी आदि उपस्थित थे।