अल्मोड़ा। जिले के आपदा प्रभावित परिवारों का सालों बार भी विस्थापन नहीं हो पाया है। गत 24 नवंबर को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिले से दो अत्यधिक संवेदनशील आपदा प्रभावित गांव भैंसियाछाना ग्राम पंचायत के बूढ़ाधार, खैरखेत तोक, बल्टा गांव के प्रभावित परिवारों की सूची तलब की थी, लेकिन इन दो गांवों के प्रभावितों के विस्थापन के लिए भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
आपदा से जिले में सबसे अधिक प्रभावित गांव भैंसियाछाना के तोक खैरखेत, बूढ़ाधार हैं। बल्टा गांव में भी आपदा से काफी नुकसान हुआ। पर वर्ष 2010 से इन आपदा प्रभावित इन गांवों के लोगों का विस्थान नहीं हो पाया है। तोक खैरखेत में छह, बूढ़ाधार के 50 परिवार, बल्टा गांव के 28 परिवार आपदा प्रभावित हैं। खैरखेत, बूढ़ाधार के परिवार आसपास के पंचायत घर, प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल में रहने को मजबूर हैं। कई बार यह ग्रामीण आंदोलन भी कर चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं 2010 में की भीषण आपदा से बल्टाबाड़ी के चार, सिराड़ के 14, देवली के छह, भूल्यूड़ा के चार, मालता के तीन, बजेठी के 10 परिवारों आपदा प्रभावित हैं। 2013 की आपदा में अल्मोड़ा तहसील के ल्वेटा में 15 परिवार, थालागूंठ में नौ परिवार, सल्ट तहसील के रड़गाड़ के छह, पनुवाद्योखन के 14 चौखुटिया के बसरखेत के 13, रानीखेत तहसील में इंदिरा बस्ती के 42 परिवार प्रभावित हैं। इन परिवारों के लिए किराए के मकानों, पंचायतों घरों, सरकारी विद्यालयों में रहना मजबूरी है।
संभावित आपदा से निपटने को तैयारियां जोरों पर
अल्मोड़ा। आगामी बरसात के मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। एसडीएम को तहसीलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर कार्मिकों की तैनाती करने के निर्देश जारी किए गए हैं। मार्गों में जेसीबी तैनात करने, लोनिवि को स्कवर, नालियों को 25 मई तक खोलकर वहां साइन बोर्ड लगाने के लिए निर्देशित किया गया है। बरसात में संभावित आपदा की स्थिति से निपटने को तहसीलों के लिए वुडकटर, आयरन कटर, स्ट्रेचर, रोप, कैराविनर, जुमार आदि क्रय कर लिए गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने ग्राम प्रधानों, ग्राम प्रहरियों, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एसएमएस सिस्टम से जोड़ा है, ताकि सूचनाएं समय से मिल सकें। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि जेसीबी ऑपरेटरों, मार्गों के नोडल अधिकारी के नंबर आपदा परिचालन केंद्र में देने को कहा गया है।