अल्मोड़ा। 2015 में शुरू हुई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के 2016 में बंद होने के बाद निजी अस्पतालों में लोगों का निशुल्क इलाज भी बंद हो गया था। हालांकि पूर्व में पंजीकृत लोगों को सरकारी अस्पतालों में पूर्व की भांति लाभ दिया जा रहा है, लेकिन अब फिर से जिला स्तर पर निजी अस्पतालों में पूर्व में पंजीकृत लाभार्थियों को लाभ दिए जाने की कार्रवाई की जा रही है। जिसके लिए सीएमओ कार्यालय की ओर से जिले के तीन निजी अस्पतालों को अनुबंध पत्र भेजा गया है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा और बेहतर इलाज के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल के दौरान एक अप्रैल 2015 को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई थी। बीमा योजना के तहत सामान्य बीमारियों में 50 हजार और गंभीर बीमारियों में एक लाख 25 हजार तक का उपचार प्रदान किए जाने का प्रावधान था। इसमें आयकरदाता की श्रेणी में आने वालों के अलावा सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स को शामिल नहीं किया गया था।
इस दौरान जिले में 85,259 लोगों का स्वास्थ्य बीमा कार्ड भी बनाया गया था और सरकारी और चयनित निजी अस्पतालों में कार्ड धारकों को इलाज की सुविधा दी गई थी, लेकिन सरकार और बीमा कंपनी के बीच अनुबंध खत्म होने के बाद दिसंबर 2016 में नए कार्ड बनने बंद हो गए और बीमा कंपनी से सीधे अनुबंध होने के कारण निजी अस्पतालों ने भी निशुल्क इलाज करने में असमर्थता जता दी थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी अस्पतालों को अनुबंध पत्र भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के जिला कोआर्डिनेटर तरुण लोहनी ने बताया कि सीएमओ कार्यालय की ओर से जिले के तीन अस्पताल नगर में अंजलि, जीवन ज्योति और रानीखेत के एमएन श्रीवास्तव को अनुबंध पत्र भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व के कार्डधारकों को वर्तमान में सीएचसी केंद्र द्वाराहाट, चौखुटिया, भिकियासैंण, धौलादेवी के अलावा जिला, महिला और बेस अस्पताल और रानीखेत के जीएस मेहरा अस्पताल में इलाज की सुविधा दी जा रही है।