फसलों की नौ प्रजातियों को मंजूरी मंजूरी
अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की नौ प्रजातियों को केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी मिल गई है। जिसके बाद सभी नौ किस्मों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इसमें गेहूं, मटर, मक्का और सोयाबीन की प्रजाति शामिल हैं।
वीपीकेएस के निदेशक अरुणव पटनायक ने बताया कि मक्का की एक संकर प्रजाति वीएल मेज हाईब्रीड 57 को जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, आसाम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम एवं त्रिपुरा क्षेत्रों के लिए संस्तुत किया गया है।
यह टर्सिकम पर्ण झुलसा रोग के लिए मध्यम तौर पर प्रतिरोधी है। सोयाबीन की वीएल सोया 89 प्रजाति को हिमाचल और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों हेतु संस्तुत किया गया है। इस प्रजाति में तेल की मात्रा 19.1 प्रतिशत है और यह फ्रागआई लीफ स्पॉट तथा फली झुलसा रोगोें के लिए प्रतिरोधी है। इसके अलावा गेहूं में वीएल गेहूं 967 प्रजाति उत्तराखंड के पर्वतीय भू-भाग के लिए संस्तुत की गई है।
वहीं गेहूं की एक अन्य वीएल गेहूं 2014 और वीएल गेहूं 3004 प्रजाति को उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में देर से बोवाई (सिंचित दशा) के लिए संस्तुत किया गया है। तीनों प्रजातियां पीली तथा भूरी गेरूई रोग हेतु प्रतिरोधी है तथा अच्छी गुणवत्ता की चपाती बनाने के लिए उपयुक्त हैं।
उन्होंने बताया कि जौ की प्रजाति वीएलबी 130 को उत्तराखंड के पर्वतीय भू-भाग के लिए संस्तुत किया गया है। यह हरा चारा और दाना के लिए उपयुक्त प्रजाति है। मडुवा की प्रजाति वीएल मडुवा 380 को पर्वतीय भू-भाग के लिए संस्तुत किया गया है। वहीं सब्जी मटर में संस्थान द्वारा दो प्रजातियों का विकास किया गया है। इनमें से जल्दी पकने वाली किस्म वीएल सब्जी मटर 13 है।
जिसकी फलियॉं लम्बी, मुड़ी हुई तथा अर्किल की तरह मिठास लिए हुए है। इसकी प्रजाति वीएल सब्जी मटर 15 उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादन के लिए संस्तुत की गई है। इसकी फलियॉं लंबी मुड़ी हुई हरी तथा आकर्षित है और प्रचलित प्रजाति आर्किल की तरह ही मिठास है।