अल्मोड़ा। क्षेत्रीय भाषा की दुर्गति कैसे हो रही है इसका नमूना कुविवि के एसएसजे कैंपस में आकर देखा जा सकता है। 2014 में राज्य सरकार ने कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा विभाग की स्थापना की थी लेकिन इन भाषाओं को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए पद ही सृजित नहीं किए। 2014- 2015 में कुमाऊंनी भाषा पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 40 के पार थी आज मात्र 24 रह गई है।
एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा के कुमाऊंनी भाषा विभाग में कुमाऊंनी भाषा पढ़ाने के लिए संविदा पर एक शिक्षिका तैनात है।
बच्चों को यहां कुमाऊंनी और हिंदी में गद्य व पद्य पढ़ाया जाता है। इस वर्ष केवल दो छात्रों ने प्रवेश लिया, जबकि चतुर्थ सेमेस्टर में दो और छठे सेमेस्टर में 20 छात्र ही अध्ययनरत हैं।
कुमाऊंनी भाषा विभाग के संयोजक प्रो. जगत सिंह बिष्ट का कहना है कि शिक्षकों के पद स्वीकृत करने के लिए कुलपति के माध्यम से शासन को कई बार पत्राचार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि जब से ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई तब से छात्र संख्या कम हुई है। दूसरा सरकार की भाषा पर स्पष्ट नीति नहीं होने से भी कुमाऊंनी भाषा की दुर्गति हो रही है।