अल्मोड़ा। केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा है कि पहाड़ों की संवेदनशीलता को देखते हुए ही यहां निर्माण कार्य किए जाने चाहिए। पहाड़ों में निर्माण कार्यों की तकनीक पहाड़ों की संवेदनशीलता के अनुकूल ही होनी चाहिए। श्री टम्टा पद्म विभूषण स्व. बीडी पांडे स्मृति समिति द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय संवाद 2017 के दूसरे दिन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित एवं अनियोजित निर्माण विषय पर आयोजित संवाद में बोल रहे थे। अन्य वक्ताओं ने सुझाव दिया कि प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और भवनों के निर्माण के लिए अलग से पर्वतीय निर्माण नीति बनाई जाए।
श्री टम्टा ने कहा कि पहाड़ों से पलायन रोकना है तो गांवों को सड़कों से जोडना होगा और सड़कें मजबूत और टिकाऊ बनानी होंगी। मनरेगा से बनाई जा रही सड़कों की नियमित मानीटरिंग और जांच कराई जाएगी। अध्यक्षता करते हुए राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में सड़क और भवन निर्माण कार्यों में एक नई तकनीक और पहाड़ी क्षेत्रों मे नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जरुरत है। पंचेश्वर बांध निर्माण पर उन्होंने तथ्यों के साथ विरोध जताया और कहा कि इससे भारत के 134 गांव और नेपाल के 128 गांवों के 3123 परिवार प्रभावित होंगे।
वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के तराई क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ी इलाकों में सड़क और भवन निर्माण कार्यों की तकनीक बेहतर खराब और अव्यवहारिक है। संवाद में पहाड़ों में बांध निर्माण की प्रक्रिया को भी पहाड़ के लोगों के हितों के विरुद्ध बताया गया। कार्यक्रम के संयोजक पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, जीबी पंत संस्थान के वैज्ञानिक डा. डीएस रावत, डा. शमशेर सिह बिष्ट, पीसी तिवारी, पूर्व आईटी सलाहकार रंजन जोशी, अनिल जोशी, हर्ष कक्कड़ आदि ने विचार रखे। संचालन संवाद के संपादक डा. रमेश चंद्र पांडे राजन ने किया। संयोजक प्रकाश चंद्र जोशी और उत्तराखंड सेवानिधि के निदेशक पद्मश्री डा. ललित पांडे ने सभी का आभार जताया।
इस अवसर पर शिवनारायण किमोठी, लक्ष्मी नेगी, महानंद बिष्ट, सिद्धि नेगी, हरिनंदन गहतोड़ी, कृष्णा गहतोड़ी, पुष्पा पुनेठा, अनिला पंत, बसंत पांडे, पूर्व पालिकाध्यक्ष शोभा जोशी, वसुधा पंत, कमल जोशी, डा. हयात रावत, अनुराधा पांडे आदि मौजूद थे।