अल्मोड़ा। शहर में 1228 मीटर लंबी टनल बनाने का मामला शासन में अटका पड़ा है। जिससे विशेषज्ञों की हरी झंडी मिलने के बाद भी लोअर मालरोड से धारानौला सिकुड़ा बैंड तक टनल नहीं बन सकी है।
नगर में मालरोड और लोअर मालरोड से धारानौला तक वाहन से करीब आठ किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। इसको देखते हुए 2015 में कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अल्मोड़ा में टनल निर्माण की घोषणा की थी। 2016 में कांग्रेस सरकार ने टनल के फिजिबिलिटी परीक्षण के लिए लोनिवि प्रांतीय खंड को 50 लाख रुपये अवमुक्त किए। इसके बाद विभाग ने टनल निर्माण की फिजिबिलिटी परीक्षण का काम गुड़गांव की कंपनी एमबर्ग इंजीनियरिंग को सौंपा।
सर्वे में कंपनी के विशेषज्ञों ने लोअर मालरोड में रोडवेज वर्कशाप के समीप से सिकुड़ा बैंड (धारानौला) तक टनल निर्माण को फिजिबिलिटी परीक्षण किया। कंपनी के विशेषज्ञों ने परीक्षण में इन स्थानों से टनल निर्माण को उपयुक्त पाया और नवंबर 2016 में रिपोर्ट लोनिवि प्रांतीय खंड अल्मोड़ा को सौंप दी।
लोनिवि ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट को अनुमोदन के लिए प्रदेश सरकार को दिसंबर 2016 में भेजा। पर यह रिपोर्ट शासन के ठंडे बस्ते में पड़ी है। लोगों को आशा थी कि केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार के आने के बाद इस पर फैसला लेगी। पर अब तक रिपोर्ट को शासन से अनुमोदन नहीं मिल सका है।
कोट---
टनल निर्माण की फिजिबिलिटी रिपोर्ट शासन स्तर पर लंबित है। सरकार से धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। पैसा स्वीकृत होने के बाद ही टनल निर्माण का काम शुरू हो सकेगा।
दीप चंद्र पांडे, सहायक अभियंता, लोनिवि प्रांतीय खंड अल्मोड़ा।