अल्मोड़ा। नगर के एनटीडी क्षेत्र में एक मात्र मृग विहार है। जहां चीतल, सांभर, तेंदुए, भालू समेत 95 जानवर रखे गए हैं। यहां रखे गए जानवरों को देखने सालभर में हजारों सैलानी पहुंचते हैं। मृग विहार के इन जानवरों के भोजन की व्यवस्था वन विभाग करता है, लेकिन इस साल अप्रैल से जानवरों के लिए विभाग के पास बजट नहीं आया है। जानवरों को भोजन उपलब्ध कराने वाले ठेकेदार पर विभाग की देनदारी लाखों में पहुंच गई है।
मृग विहार में 67 चीतल, 13 सांभर, पांच मादा और चार नर समेत नौ तेंदुए, तीन खरगोश और एक-एक भालू, बंदर और काकड़ समेत 95 जानवर स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। विभिन्न जगहों से लाए गए इन जानवरों को देखने हर रोज यहां काफी संख्या में सैलानी आते हैं।
पिछले साल 47 हजार सैलानी मृग विहार का भ्रमण कर चुके हैं और विभाग को नौ लाख 18 हजार रुपये का लाभ मिला। इस साल भी अब तक 30 हजार से अधिक सैलानी मृग विहार का भ्रमण कर चुके हैं, लेकिन अंदर की हकीकत कुछ और है। विभाग के पास बजट नहीं है और इन जानवरों के भोजन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
इन जानवरों को हर रोज मांस, रोटी, नमक, पशु आहार, फल आदि की जरूरत रहती है। जिसके लिए विभाग ने ठेकेदार के माध्यम से जानवरों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है, लेकिन इस साल अप्रैल से बजट नहीं आने के कारण जानवरों के भोजन पर संकट पैदा हो गया है। ठेकेदार द्वारा भी भोजन की व्यवस्था उधारी में की जा रही है। विभाग पर देनदारी ज्यादा होने से और धन की कमी होने पर जानवरों के भोजन पर भी संकट मंडरा रहा है।
इधर मृग विहार के वन क्षेत्राधिकारी मोहन राम ने बताया कि एक माह में करीब दो लाख 13 हजार रुपये खर्च आता है। जिसमें अकेले तेंदुओं के खाने पर एक लाख 16 हजार और अन्य जानवरों के भोजन पर 97 हजार रुपये का खर्च आता है। सालभर का हिसाब लगाएं तो जानवरों के भोजन में करीब 25 लाख रुपये खर्च आता है। उन्होंने बताया कि डीएफओ के माध्यम से शासन को पत्र भेजकर बजट उपलब्ध कराने की मांग की जा चुकी है।