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भारत में कव्वाली का स्वर्णिम भविष्य मानते हैं प्रसिध्द कव्वाल चांद निजामी

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प्रसिद्ध कव्वाल चांद निजामी। - फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। रॉक स्टार फिल्म में कुन फाया कुन... कव्वाली गाकर चर्चा में आए जाने माने कव्वाल चांद निजामी का कहना है कि भारत में कव्वाली का भविष्य बहुत अच्छा है। जहां कुछ दशक पहले तक कव्वालों को सिर्फ खानकाओं और दरगाहों में ही बुलाया जाता था लेकिन आज कव्वालों को फिल्मों में भी काम करने का मौका मिल रहा है। चांद निजामी 750 साल पुराने खानदान से आते हैं जिनके पूर्वज कभी अकबर, बहादुर शाह जफर के दरबार में भी कव्वाली गाते थे। हाल के दौर में निजामी बंधुओं को काफी प्रसिद्धि मिली है।
अल्मोड़ा महोत्सव में कव्वाली नाइट में पहुंचे चांद निजामी ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि कव्वाली सूफी संगीत का हिस्सा है। कव्वाली से जहां संगीत का आनंद मिलता है वहीं इसके जरिये कबीर, सूरदार, अमीर खुसरो जैसे महान रचनाकारों की कविताओं को शामिल करके समाज में अच्छा संदेश पहुंचता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में कव्वाली बहुत पसंद की जाने लगी है। युवा और बच्चे भी इसे काफी पसंद करते हैं। कव्वाली ऐसा संगीत है जिसे पुराने गीतों की तरह लोग लंबे समय तक याद रखते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह कुन फया कुन... कव्वाली को आज तक की सर्वश्रेष्ठ मानते हैं क्योंकि इसमें कुरान की आयतों को भी शामिल किया गया है।
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वह बोले फिल्मों के नजरिये से बरसात की रात फिल्म की कव्वाली न तो कारवां की तलाश है...को वह सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। उन्होंने बताया कि आगामी एक साल के भीतर आ रही दो अन्य फिल्मों में आजमगढ़ और सिकर में भी वह कव्वाली गा रहे हैं। निजामी बंधु साल भर में करीब 150 से अधिक शो करते हैं। इनमें हर साल छह-सात शो विदेशों में होते हैं।

चांद निजामी बंधुओं की टीम में परिवार के पांच लोग
अल्मोड़ा। चांद निजामी बंधुओं के शो में मुख्य रूप से पांच लोगों की टीम रहती है। इसमें चांद निजामी और उनके दो भतीजे शादाब निजामी तथा शोहराब निजामी के साथ ही चांद निजामी के दो बेटे गुलखान और कामरान शामिल रहते हैं। अल्मोड़ा भी यही टीम आई थी।
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बजरंगी भाईजान फिल्म का पहला गीत भी चांद निजामी ने गाया
अल्मोड़ा। सलमान खान की प्रसिद्ध फिल्म बजरंगी भाई जान के निर्देशक कबीरखान की ख्वाइश थी कि फिल्म की शुरुआत हजरत निजामुद्दीन की दरगाह से शुरू की जाए। फिल्म का पहला दृश्य वहीं से शुरू हुआ जिसमें चांद निजामी ने अमीर खुसरो साहब का रंग कॉल (गीत) आज रंग है रंग हे मा रंग है...गाया है।

 
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