अल्मोड़ा। पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना के लिए पिछले वर्ष पर्यटन विभाग ने जिला योजना में 37 योजनाएं प्रस्तावित की थीं। जिनमें से केवल 24 योजनाओं के लिए ही धन आया। अभी भी 12 योजनाओं के लिए बजट आना बाकी है। वहीं पर्यटन विभाग की अल्प विकसित पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना भी बजट के अभाव में अभी ठंडे बस्ते में है।
अल्मोड़ा में काफी संख्या में पर्यटन केंद्र हैं। 2016 में अल्मोड़ा में 1,0648 पर्यटक पहुंचे थे। वहीं 2017 में पर्यटक बढ़कर 1,09204 हो गए। जिले में जागेश्वर, बिनसर, रानीखेत, मर्चूला जैसे तमाम पर्यटक स्थल हैं जहां हर साल काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। कई पर्यटक स्थल विकास नहीं होने से गुमनाम हैं जबकि कुछ अल्पविकसित हैं। जिले में जलना, पांडेखोली, पिनाक, कुकुछीना आदि ऐसे अल्प विकसित पर्यटन स्थल हैं, जहां पर्यटक तो आते हैं लेकिन सुविधाएं नहीं होने से इसे ज्यादा महत्व नहीं मिल पाता है। पिछले साल पर्यटन विभाग ने इन स्थलों को विकसित करने के लिए 37 योजनाएं जिला योजना में प्रस्तावित की थीं। जिनमें से केवल 24 योजनाओं के लिए 92.59 लाख रुपये आया। जबकि 12 योजनाएं अभी भी अधूरी पड़ी हैं। इनमें कांडे, जालबगड़ी, मल्ली नाली तोक, धूना नाली और बडगल आदि जगहों पर यात्री विश्राम गृह, व्यू प्वाइंट आदि बनाए जाने थे।
अल्प विकसित स्थल भी नहीं हो पाए विकसित
जिले में ग्राम पच्चीसी, बसभीड़ा, भन्यौलासेम, तिमला, भाटकोट, टाना के चमड़खान आदि स्थान खूबसूरत हैं, लेकिन अल्प विकसित होने के कारण पर्यटन विभाग ने इन जगहों पर भी व्यू प्वाइंट बनाने की योजना बनाई थी।
इसके अलावा खनुली, मानिला के सदरा आदि में स्थल विकास और बडगल तोक डोबरा में यात्री विश्राम गृह की योजना भी तैयार की थी। इनमें भी बजट कम आया जिससे कुछ ही स्थलों पर व्यू प्वाइंट बनाने का काम हो सका।
पर्यटन विभाग को जिला योजना में रखी 24 योजनाओं के लिए बजट मिल चुका है। बाकी पैसा भी जल्द मिल जाएगा। बजट मिलने के बाद जिला योजना में बची हुई अन्य योजनाओं में काम करने केे अलावा अल्प विकसित पर्यटन स्थलों को विकसित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा। - कीर्ति आर्या। जिला पर्यटन अधिकारी।