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खटीमा गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

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अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहिनी ने खटीमा गोलीकांड के शहीदों को याद करते हुए कहा कि दो सितंबर 1994 को मसूरी में वीर बलिदानियों की शहादत से ही उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ, लेकिन इन 17 सालों में राज्य की अवधारणा पूरी तरह बदल गई है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य बनने के बाद उत्तराखंड की सत्ता अप्रत्यक्ष रूप में लकड़ी, लीसा, बजरी, खड़िया, बोल्डर और शराब तस्करों के हाथ में आ गई और यही लोग उत्तराखंड के भाग्य विधाता बन गए जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
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उलोवा कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि जब उत्तराखंड राज्य नहीं था तब लड़ाई लड़ना आसान था, लेकिन आज अपने लोगों से लड़ना कठिन है क्योंकि उत्तराखंड के भाग्यविधाता बनने वाले उत्तराखंड राज्य के बाहर के नहीं बल्कि उत्तराखंड के ही लोग हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में स्कूल हैं तो शिक्षक नहीं हैं। अस्पताल हैं तो डाक्टर नहीं और सड़कें हैं तो सुरक्षा नहीं है। अधिकारियों, नेताओं और कर्मचारियों की फौज होने के बाद भी व्यवस्था चौपट है।

वक्ताओं ने कहा कि जिन पहाड़ी जनपदों से उत्तराखंड राज्य के लिए संघर्ष हुआ था वहां पलायन बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभी तक जितने मुख्यमंत्री उत्तराखंड से बने हैं वे सभी पहाड़ों से पलायन कर चुके हैं इसलिए पलायन पर उनका मौलिक और व्यापक दृष्टिकोण हो ही नहीं सकता। कार्यक्रम में पूरन चंद्र तिवारी, जंग बहादुर थापा, दयाकृष्ण कांडपाल, बिशन दत्त जोशी, हरीश मेहता, अनीसउद्दीन, शेर बहादुर गुरूंग, कमलेश थापा, सुशीला धपोला, रेवती बिष्ट आदि मौजूद थे।
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