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सीमांत गांवों में रहने वाले लोग घर बैठे करेंगे कमाई

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सीमांत गांवों में रहने वाले लोग घर बैठे करेंगे कमाई
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अल्मोड़ा। बेरोजगारी बढ़ने और खेती-बाड़ी कम होने आदि कारणों से पहाड़ से लगातार पलायन हो रहा है। दूसरी तरफ सुरक्षा की दृष्टि से सीमांत गांवों का आबाद रहना जरूरी है। इसे देखते हुए सरकार ने पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के अंतर्गत चीन की सीमा से लगे सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के लिए आदि कैलाश और ग्लेशियरों की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को होम स्टे के तहत सीमांत गांवों में ठहराने का निर्णय लिया है। यात्रियों के रहने-खाने का पूरा प्रबंध गांव के लोग करेंगे। जिससे उनकी आय बढ़ेगी। यात्रा का आयोजन कराने वाले कुमाऊं मंडल विकास निगम ने तय किया है कि हर यात्री जाते अथवा लौटते वक्त एक बार निगम के गेस्ट हाउसों में ठहरेंगे और एक बार होम स्टे के तहत गांवों में रात्रि विश्राम करेंगे।
इस साल आदि कैलाश यात्रा नौ जून से शुरू हो रही है। पहला दल नौ जून को दिल्ली से चलकर 10 जून को अल्मोड़ा पहुंचेगा और अगला दल 11 को अल्मोड़ा पहुंच जाएगा। इस बार आदि कैलाश जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है। पिछले साल जहां 300 लोग आदि कैलाश गए थे वहीं इस बार यह संख्या करीब 500 तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा इन दिनों पंचाचूली, दारमा, मिलम, रालम, पिंडारी, सुंदरढूंगा, नामिक आदि ग्लेशियरों की यात्रा में भी काफी संख्या में लोग जा रहे हैं। आदि कैलाश सहित ग्लेशियरों की यात्रा का आयोजन मुख्य रूप से कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा किया जाता है। हालांकि यात्रा मार्ग में स्थित पड़ावों में स्टे के लिए निगम ने गेस्ट हाउस बनाए हैं, लेकिन सीमांत क्षेत्र के गांवों में रहने वाले लोगों को आंशिक रूप से रोजगार दिलाने और उनके लिए आय के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से निगम ने इस बार यात्रा में जाने अथवा लौटने पर एक बार हर पड़ाव में होम स्टे कराना अनिवार्य किया है।
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कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने बताया कि यात्रा में स्थित सिरखा, बूंदी, कुटी, गाला, गुंजी,बाछम, खाती, नामिक आदि गांवों में लगभग हर परिवार को होम स्टे से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि निगम इसके लिए फेसिलिटेटर का काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि यात्री एक तरफ जहां निगम के गेस्ट हाउसों में स्टे करेंगे, वहीं एक बार गांवों में होम स्टे करेंगे। होम स्टे के लिए घरों में विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। खुद निगम ने लोगों को बर्तन, बिस्तर सहित अन्य जरूरी सामान भी मुहैया कराया है और बाकायदा स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। ताकि होम स्टे में रहने वाले यात्रियों को अच्छी सुविधा मिल सके। इससे यात्रियों को स्थानीय संस्कृति और विशिष्ट भोजन का आनंद भी मिल सकेगा। दूसरी तरफ सीमांत क्षेत्र में रहने वाले लोगों को गांव में ही सीमित रोजगार प्राप्त हो सकेगा, इससे दूरस्थ गांवों से पलायन पर भी रोक लग सकेगी।
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