अल्मोड़ा। कांग्रेस शासनकाल में गुरुड़ाबांज में स्वीकृत हरि प्रसाद टम्टा शिल्प उन्नयन संस्थान का काम अधर में लटक गया है। सौ करोड़ रुपये की लागत के इस संस्थान के लिए कांग्रेस शासन में तीन करोड़ ही मिले हैं, लेकिन भाजपा शासनकाल में धनराशि स्वीकृत नहीं हुई। जिससे इस संस्थान का काम आगे नहीं बढ़ सका है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गुरुड़ाबांज में सौ करोड़ रुपये की लागत के हरिप्रसाद टम्टा शिल्प उन्नयन संस्थान को स्वीकृति दी। इस संस्थान का उद्देश्य उत्तराखंड की स्थानीय शिल्प कला के उन्नयन के साथ ही विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करना था, ताकि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ सकें और पलायन पर रोक लगे।
संस्थान में प्राचीन शैली में पत्थर के भवन बनाने, ताम्र शिल्प, पीतल उद्योग, रिंगाल और बास से वस्तुएं बनाने, लोहार का प्रशिक्षण देने समेत उत्पादन और विपणन की व्यवस्था की जानी थी, साथ ही प्रशिक्षणार्थियों के रहने के लिए हॉस्टल का भी निर्माण प्रस्तावित है। प्रशिक्षण लेने के उपरांत ग्रामीणों को कच्चा उत्पाद भी उपलब्ध कराने की योजना थी, ताकि उनकी आजीविका में सुधार हो सके।
कांग्रेस शासनकाल में तीन करोड़ रुपये अवमुक्त हुए। इस धनराशि से समतलीकरण, चहारदीवारी, सड़क निर्माण, पानी, बिजली की लाइन बिछाने, टंकी निर्माण के अलावा भवन की बुनियाद डालने के काम हुए, लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद काम आगे नहीं बढ़ सका है।
क्षेत्रीय विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद पिछले दो साल से अधिक समय से संस्थान के लिए कोई बजट अवमुक्त नहीं हुआ है, जिससे इस महत्वपूर्ण संस्थान का काम ठप पड़ गया है। भाजपा सरकार को शेष बजट अवमुक्त कर जल्द निर्माण कार्य पूरा करवाना चाहिए। ताकि संस्थान का लाभ जनता को मिल सके।