अल्मोड़ा। पशुपालन विभाग जिले में पशुपालकों की आजीविका बढ़ाने के लिए अच्छी नस्ल की बकरियां पालने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करेगा। विभाग भैंसवाड़ा फार्म में वर्षों से खाली पड़ी विभाग की भूमि पर बकरी नस्ल सुधार केंद्र खोलेगा। इसके लिए विभाग ने पांच करोड़ का प्रस्ताव पशुपालन निदेशालय को भेजा है।
जिले के ग्रामीण इलाकों में अधिकांश ग्रामीण खेती और पशुपालन से ही आजीविका चलाते हैं। कई काश्तकार बकरी पालन करते हैं। जिले में वर्तमान में पशुपालक करीब दो लाख बकरियां पालते हैं। अधिकांश पशुपालकों द्वारा चौगर्खा प्रजाति की बकरियां पाली जाती हैं। चौगर्खा प्रजाति यहां की परंपरागत नस्ल है। विभागीय सूत्रों के अनुसार नस्ल सुधार नहीं होने से चौगर्खा प्रजाति की बकरी की बढ़वार अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो रही है। इसके लिए पशुपालन विभाग की अब बकरियों की नस्ल सुधार की योजना है।
विभाग द्वारा शीप एंड ऊलन बोर्ड उत्तराखंड के माध्यम से यहां भैसवाड़ा फार्म में बकरी नस्ल सुधार केंद्र खोलेगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. रवींद्र चंद्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश के इटावा और अन्य क्षेत्रों से यहां बरबरी और ब्लैक बंगाल प्रजाति की बकरियां और बकरे लाए जाएंगे। केंद्र में दो सौ बकरियां और बीस बकरे रखे जाएंगे। विभाग केंद्र के माध्यम से बकरियों के नस्ल सुधार के लिए कार्य करेगा। इसके अलावा काश्तकारों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्य ग्रामीणों को बकरी पालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके जहां पशुपालक अच्छी नस्ल की बकरी पालन को प्रोत्साहित होंगे वहीं उनकी आजीविका में भी बढ़ोतरी होगी। विभाग द्वारा इस संबंध में पांच करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर पशुपालन निदेशालय को भेजा गया है। डा. चंद्रा ने बताया कि धनराशि अवमुक्त होने के बाद केंद्र का संचालन शुरू होगा।