जिले में वाहन दुर्घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस वर्ष भी साढ़े चार माह के भीतर 13 वाहन दुर्घटनाओं के मामले आ चुके हैं। इन दुर्घटनाओं में 20 लोग मारे गए जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। अधिकतर दुर्घटनाएं छोटे चौपहिया वाहनों से ही हुई हैं। पर्वतीय क्षेत्र में वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अभियान चलाने के साथ चालकों को जागरूक करने के बाद भी घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
साल की शुरुआत में 26 जनवरी को सेराघाट के पास आल्टो कार दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत और एक घायल हुआ। 12 फरवरी को दो वाहन दुर्घटनाएं हुईं। पहली लोधिया के पास कार दुर्घटना में चार घायल हुए, वहीं बाराकूना खेती रोड में नायल बैंड के पास टिप्पर दुर्घटना में एक की मौत हो गई थी। 18 फरवरी को धौलछीना के पास ट्रक दुर्घटना में एक घायल हुआ। सबसे बड़ी दुर्घटना 13 मार्च को खल्यूं टोटाम के पास केमू बस दुर्घटना में हुई। जिसमें 13 लोगों की मौत और 14 लोग घायल हुए थे।
अप्रैल में भी वाहन दुर्घटना के चार मामले सामने आए। तीन अप्रैल को कालीधार पेटशाल के पास पिकप दुर्घटना में एक की मौत हुई तो 12 अप्रैल को फलसीमा के पास डंपर दुर्घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ। 19 अप्रैल को दो अलग अलग स्थानों चितई के पास कालीधार में रिकवरी वैन दुर्घटना में एक मौत और दो घायल और क्वारब के पास आयशर ट्रक दुर्घटना में दो लोग घायल हुए थे।
आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार चार मई को काफड़खान के पास टिप्पर दुर्घटना में एक की मौत और पांच मई को अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ रोड पर भनोली के पास आल्टो कार दुर्घटना में दो लोग घायल हुए थे। 12 मई को मछोड़ के पास चौड़ी घट्टी में कार दुर्घटना में पांच लोग घायल हुए थे, वहीं 17 मई को भगतोला सोमेश्वर के पास आल्टो कार दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस और एआरटीओ विभाग द्वारा लगातार चेकिंग अभियान और चालकों को यातायात नियमों का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। बावजूद इसके दुर्घटनाओं में कमी नहीं आ रही है और हर माह चार से पांच वाहन दुर्घटनाएं हो रही हैं। इधर बीते दिन जिलाधिकारी ईवा आशीष ने पुलिस और परिवहन विभाग को यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।