अल्मोड़ा। धर्मनिरपेक्ष युवा मंच की ओर से आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं कहा कि वर्तमान में विकास का मॉडल ग्रामीणों की आय बढ़ाने में असफल साबित हो रहा है। जिससे युवा वर्ग गांवों से पलायन को मजबूर हैं। बंदरों और सुअरों के आतंक से ग्रामीण खेती करने से हतोत्साहित हो रहे हैं। काश्तकारों ने सरकार से गांवों में जगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए कारगर उपाय करने और उत्पादों के विपणन की व्यवस्था करने की मांग उठाई।
अल्मोड़ा के गांवों से पलायन रोकने के विकास मॉडल पर चर्चा विषय पर हुई गोष्ठी में चौमू के कृषक पान सिंह कनवाल ने कहा कि दुग्ध उत्पादन कर ग्रामीण आय बढ़ा सकते हैं। सैनार की महादेवी सुप्याल, पहल की रमा कनवाल, सैनार की तुलसी देवी, गीता कनवाल ने कहा कि वह खेतों मे आलू बीज बोते हैं, लेकिन सुअर फसल नष्ट कर देते हैं।
बल्टा के अर्जुन सिंह मेहता, किशन सिंह मेहता ने कहा कि जंगली जानवरों के आतंक से बचाव के लिए रामबांस, अदरक, लहसुन, पहाड़ी मसाले, कीवी जैसी नकदी फसल अपनानी होगी। सरकार को सब्जी, मडुवा, झुंगरा के विपणन की भी व्यवस्था करनी चाहिए। तिखनू पट्टी के गोपाल गुरुरानी, हरेंद्र रावत ने कूरी की झाड़ियों को खेती के लिए नुकसानदायक बताया। सेराघाट के सल्ला भाटकोट आदि क्षेत्रों से आए संतोष कुमार, रूप सिंह, प्रकाश पांडे ने कहा कि सरयू नदी के तट पर बसे गांवों में पहाड़ी केला और आम काफी मात्रा में होता है, लेकिन विपणन की व्यवस्था नहीं होने सस्ते दाम पर फल बेचने पड़ते हैं।
मंच के संयोजक विनय किरौला ने पिछले दो साल से गांव चलो अभियान के तहत मंच ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और अन्य आधारभूत संरचना को ग्रामीणों की आर्थिकी से जोड़ने को जरूरी बताया है, ताकि गांव में होने वाली पैदावार को बाजार तक ले जाया जा सके। संचालन देव सिंह भोजक ने किया। गोष्ठी में नरेंद्र मेहता, नवाज खान, डा. रमेश पांडे राजन, बलवंत टम्टा, सुरेश डांगी, जमन सिंह बिष्ट, हेमंत पाठक, हेमा देवी, ललित मोहन पंत आदि ने विचार रखे।