अल्मोड़ा। लीसा इकाई वेलफेयर सोसाइटी की यहां हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मैदानी इलाकों में वन विभाग और पुलिस द्वारा पकड़े जा रहे लीसा उत्पाद को बगैर सबूत के अल्मोड़ा का बताया जाना सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र को बदनाम कर यहां के लीसा उद्योगों को बंद करने की साजिश है।
वक्ताओं ने कहा कि पिछले कई समय से दक्षिणी वृत्त के अंतर्गत लालकुआं, रुद्रपुर, शांतिपुरी, किच्छा, काशीपुर, बरेली रोड, मुरादाबाद में वन विभाग और पुलिस द्वारा पकड़े जा रहे लीसा, बिरोजा, वार्निश को अल्मोड़ा वन प्रभाग के अंतर्गत का बताया जा रहा है जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा के विभागीय अधिकारियों द्वारा इकाई निरीक्षण के नाम पर लीसा उद्योग में कार्यरत लीसा श्रमिकों और लीसा इकाईयों को लगातार परेशान किया जा रहा है।
जबकि मैदानी क्षेत्रों को लीसा उत्पाद बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल, हल्द्वानी और गढ़वाल प्रभागों के मार्गों से भी होकर जाता है। पकड़े जाने पर इन क्षेत्रों का नाम नहीं आता है, यदि भविष्य में बिना सबूत के अल्मोड़ा का नाम बेवजह घसीटा गया तो आंदोलन किया जाएगा और उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी। बैठक में लीसा श्रमिक और लीसा इकाई स्वामी हयात सिंह मेहरा, रमेश भाकुनी, सुनील पेटशाली, महिपाल सिंह, सुरेंद्र बेलवाल, भुवन कांडपाल, बालम भाकुनी, राजू कैड़ा, अनिल शाही, राजेंद्र किरौला, भूपाल अधिकारी, चंदन भोज, मुकुल पेटशाली, वीरेंद्र शाही, सागर पांडे, बलवंत मेहता, सचिन मेहता, आनंद डंगवाल, अरविंद बिष्ट, चंदन लाल टम्टा, रमेश बिष्ट, महेश न्याल आदि ने भाग लिया।
बगैर सबूत के अल्मोड़ा को बदनाम करने का आरोप
लीसा इकाई वेलफेयर सोसाइटी की बैठक