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जिला अस्पताल में छह माह से नहीं है रेबीज के वैक्सीन

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अल्मोड़ा। एक ओर नगर क्षेत्र के लोग लावारिस कुत्तों और बंदरों के आतंक से परेशान हैं। वहीं दूसरी ओर इन जानवरों के काटे जाने के बाद अस्पताल पहुंचने वाले रोगियों को रैबीज के वैक्सीन लगाने के लिए हजारों रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल में पिछले छह माह से रैबीज के वैक्सीन नहीं पहुुंचे हैं। जिससे सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब तबके के लोगों को हो रही है।
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जिला अस्पताल में पिछले डेढ़ माह में 83 लोग रेबीज के वैक्सीन लगाने पहुंच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा बंदर और कुत्ते के काटे मरीज हैं। जून माह में ही 44 मरीज रेबीज के वैक्सीन की मांग कर चुके हैं। इनमें कुत्ते के काटे 29, बिल्ली के काटे चार और बंदर के काटे 11 मरीज शामिल हैं। वहीं जुलाई माह में अब तक 39 मरीज वैक्सीन लगाने पहुंचे जिनमें 28 कुत्ते, नौ बंदर और एक बिल्ली और एक चूहे के काटे मरीज शामिल हैं।


इंजेक्शन कक्ष के चीफ फार्मेसिस्ट एमसी रिखाड़ी और फार्मेसिस्ट स्टोर बीडी साह ने बताया कि अस्पताल में हर रोज रैबीज के वैक्सीन लगाने के लिए काफी मरीज पहुंच रहे हैं लेकिन पिछले छह माह से उपलब्धता नहीं होने से दिक्कत आ रही है। इधर, जिला अस्पताल के सीएमएस प्रकाश वर्मा का कहना है कि रैबीज के वैक्सीन की कमी प्रदेश स्तर पर चल रही है। अल्मोड़ा से हर माह मांग जा रही है, लेकिन निदेशालय स्तर से इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं।
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बाजार में 320 रुपये का आता है एक इंजेक्शन
अल्मोड़ा। अस्पतालों में निशुल्क रूप से लगने वाले रैबीज के वैक्सीन काफी महंगे हैं। करीब 320 रुपये का एक इंजेक्शन आता है। जबकि किसी भी जानवर द्वारा काटने पर मरीज को एक माह के अंदर कम से कम पांच इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। लोगों को मजबूरन बाजार से महंगे इंजेक्शन खरीदने पड़ रहे हैं।
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