अल्मोड़ा। बारिश के मौसम में घरों के आसपास खतरा बने पेड़ों के ढहने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में प्रभावित लोगों द्वारा प्रशासन और वन विभाग से इन पेड़ों को काटने की मांग की जाती है, लेकिन वन विभाग और वन विकास निगम के अधिकारियों ने खतरा बने पेड़ों की समस्या से निपटने के लिए नया रास्ता निकाल लिया है। ऐसे ही एक नये मामले में सुनौला के ग्रामीण ने घर के लिए खतरा बने चीड़ के दो पेड़ों को हटाने की मांग की तो वन निगम ने इन पेड़ों की लॉपिंग कराने के लिए ग्रामीण से 40 हजार रुपये जमा कराने को कहा है। बता दें कि बीते दिनों भी ऐसे ही एक मामले में एक व्यक्ति से 37 हजार रुपये जमा करने को कहा गया था।
सुनौला गांव निवासी हरीश सिंह नेगी ने बताया कि उनके घर के ऊपर वन भूमि में चीड़ के दो विशाल पेड़ गिरने की स्थिति में हैं। बारिश के मौसम में कभी भी कोई हादसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह कई बार डीएम और डीएफओ को पत्र लिख चुके हैं। इधर, डीएम के आदेश पर डीएफओ ने प्रभागीय लौगिंग प्रबंधक को इन पेड़ों के निस्तारण के लिए पत्र लिखा। वन विभाग या वन निगम द्वारा पेड़ों की लॉपिंग कराने के बजाय हरीश सिंह नेगी को एक पत्र भेजकर पेड़ों की लॉपिंग कराने के लिए 40 हजार रुपये जमा कराने को कहा गया है।
हरीश सिंह का कहना है कि जिस जमीन पर पेड़ है, वह वन भूमि है। ऐसे में उनके घर के लिए खतरा बने पेड़ को हटाने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की ही है। वैसे भी पेड़ों को हटाने के लिए 40 हजार की रकम बहुत ज्यादा है। बता दें कि बीते दिनों पोखरखाली निवासी एक व्यक्ति से जेल विभाग की जमीन पर लगे पेड़ की लॉपिंग के लिए 37 हजार रुपये मांगे गए थे।
दिलचस्प यह है कि पेड़ों की लॉपिंग से मिलने वाली लकड़ी संबंधित व्यक्ति को नहीं मिलेगी। इस लकड़ी को वन निगम अपने टाल में भेज देता है। इस बारे में डीएफओ का कहना है कि वन निगम द्वारा पेड़ों के निस्तारण के लिए उक्त धनराशि की मांग की जा रही है। इधर, वन विभाग और वन निगम के इस रवैये से प्रभावित लोग परेशान हैं। उन्होंने इस बारे में डीएम से जरूरी कदम उठाने की मांग की है।