अल्मोड़ा। कुमाऊं के एकमात्र लेप्रोसी मिशन की हालत बिगड़ती जा रही है। न तो कुष्ठ रोगियों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध हो पा रही और न ही मिशन कर्मचारियों को दो माह से वेतन मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि मिशन आगे किस तरह चलेगा इसकी उनको चिंता होने लगी है। मिशन की ओर से जनप्रतिनिधियों और सरकार से भी गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अभी तक किसी भी तरह की मदद लेप्रोसी मिशन को नहीं मिल पाई है।
लेप्रोसी मिशन बदतर हालात में पहुंच चुका है। न तो मिशन के पास फंड है और न ही किसी भी तरह का डोनेशन मिल रहा है। इलाज के लिए रह रहे 24 कुष्ठ रोगियों को खाने के लाले पड़ गए हैं। कुष्ठ रोगियों की सेवा में लगे आठ कर्मचारियों को भी दो माह से वेतन नहीं मिला है।
पूर्व में मिशनरीज और विदेशी संस्थाओं के अलावा अन्य स्थानीय संस्थाओं से किसी प्रकार मदद लेकर लेप्रोसी मिशन को चलाया जा रहा था, लेकिन 2010 से लेप्रोसी मिशन में दिक्कतें खड़ी हो गई3। किसी तरह चंदे से काम चल रहा था अब वह भी बंद हो गया। कुछ साल से राजभवन से आर्थिक सहायता भी मिल रही थी। इस बार वह भी नहीं मिली। राजभवन से सालभर में करीब एक लाख रुपये आर्थिक सहायता के तौर पर मिशन को दिया जाता है।
मिशन के प्रभारी आनंद सिंह ने बताया कि लेप्रोसी मिशन काफी खराब हालत में पहुंच चुका है। जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार से तक आर्थिक सहायता की मांग की है। अभी तक कोई भी मदद नहीं मिली है।