चौखुटिया (अल्मोड़ा)। वन विभाग द्वारा पिछले पंद्रह दिनों से तेंदुए को पकड़ने के लिए की जा रही कवायद हवाई साबित हो रही है। असल में इसके पीछे तेंदुए को आदमखोर घोषित न किया जाना बड़ी वजह है। विभाग अब तक तेंदुआ इधर देखा, उधर देखा की बातों पर ही उलझकर रह गया है।
वन विभाग ने तेंदुए द्वारा दो महिलाओं को निवाला बनाने के बाद हालांकि एक तेंदुए का मार डाला है, लेकिन लोग शुरू से ही उसे आदमखोर नहीं मान रहे हैं। ग्रामीणों के रोष को देखते हुए विभाग द्वारा भले ही गांव में तीन शिकारियों की तैनती की है, परंतु तेंदुआ आज तक आदमखोर घोषित नहीं किया गया है।
वन क्षेत्राधिकारी हरीश खर्कवाल का कहना है कि तेंदुए को आदमखोर घोषित करने की दिशा में उनकी ओर से सभी कागजात आदि तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दिए गए हैं।
इधर जब तक तेंदुआ आदमखोर घोषित नहीं होता है तब तक विभाग लखपत सिंह रावत जैसे अनुुभवी शिकारियों की तैनाती भी नहीं कर सकता है। इसी के चलते फिलहाल तीन स्थानीय शिकारियों को ही लगाया गया है। तेंदुआ विभाग द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप में भी नहीं दिखा है ।