अल्मोड़ा। उत्तरांचल जैविक उत्पादक एवं प्रौद्योगिकी विकास स्वायत्त सहकारिता द्वारा पारिस्थितिकीय को जानने और मानव को पारिस्थितिकीय से जोड़ने के लिए विचारों के आदान-प्रदान को लेकर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन हो गया है। वक्ताओं ने लोगों से जल और प्रकृति के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।
वैज्ञानिक डॉ. पंपोश कुमार ने कहा कि युवा पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी से जुड़ें। पथप्रदर्शक बनकर समाज में जागरूकता लाएं। राजस्थान के बूंदी से आई डॉ. सुनीता झाला, जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के शोधार्थी रवि पाठक ने जैव विविधिता के बारे में बताया। वसुंधरा संस्था के हिमांशु जोशी ने जल संरक्षण के साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में अवगत कराया। हरीश बिष्ट ने कहा कि सूख चुके नौलों धारों को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। सौरभ साह, राजेश कुमार शुक्ला, संजय जोशी, गर्वित पंत, इंदर भोज, चंदन, निधि जोशी आदि ने विचार रखे। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को सिमतोला ईको पार्क का भ्रमण भी कराया गया। कार्यशाला में हिमाचल और उत्तराखंड के 20 युवाओं ने भाग लिया। ब्यूरो