अल्मोड़ा। सरस्वती शिशु मंदिर जीवनधाम में हुए अभिभावक सम्मेलन में मुख्य अतिथि डा. एसएस पथनी ने कहा कि शिक्षकों को अपने शिक्षण कौशल को और उतम बनाने के लिए शिशु के व्यक्तित्व विकास तथा नवाचार का प्रयोग करना आवश्यक है। अभिभावकों को शिशु के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए तथा कर्तव्यों का ठीक से पालन करना चाहिए।
अधिवक्ता पंकज लटवाल ने कहा कि शिशुओं को अच्छे संस्कार देकर कर्तव्यों का ठीक से पालन करना चाहिए। अभिभावक बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि जगाने का प्रयास करें। विद्यालय के उपाध्यक्ष गोपाल सांगा ने कहा कि शिशु के साथ शिशु बनना चाहिए। प्रधानाचार्य भैरव सिंह कार्की ने कहा कि माता बच्ची की प्रथम शिक्षिका है। वह बच्चे को मनोविज्ञान को जानती है।
विद्या भारती का लक्ष्य शिशु का सर्वांगीण विकास करना है। इस मौके पर वर्ष का वार्षिक बजट पारित किया गया। सम्मेलन में आनंदी मनराल, गोदावरी चतुर्वेदी, ललित जोशी आदि मौजूद थे। संचालन गिरिजा पाठक, पूनम जोशी ने किया। ब्यूरो