सात साल से वनभूमि की स्वीकृति का इंतजार
नहीं बन पाई क्वारब-पेटशाल सड़क
मार्ग निर्माण के लिए शासन से स्वीकृत हैं 9.80 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
अल्मोड़ा। तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की घोषणा के सात साल बाद भी वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिलने से 28 किमी लंबे क्वारब-पेटशाल बाइपास सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है, जबकि मार्ग के निर्माण के लिए शासन से 9.80 करोड़ रुपये पूर्व में ही स्वीकृत हैं। इस कारण सुयाल घाटी कई गांव यातायात सुविधा से वंचित हैं।
अल्मोड़ा शहर की सड़कों में वाहनों का दवाब काफी बढ़ गया है। संकरी सड़कों में चलते यातायात अव्यवस्था रहती है। शहर की सड़कों में दबाव कम करने और यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने करीब सात साल पहले क्वारब-पेटशाल बाइपास सड़क बनाने की घोषणा की थी। सरकार ने इस सड़क के लिए 9.80 करोड़ रुपये भी मंजूर कर रखे हैं।
मुख्यमंत्री की घोषणा को करीब सात वर्ष बीत गए हैं पर अब तक सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। सड़क के अभाव में सुयाल नदी से लगे करीब आधा दर्जन गांव यातायात सुविधा से अब तक नहीं जुड़ पाए हैं। यदि यह सड़क बनती है तो इससे जहां यह गांव यातायात से जुड़ेंगे, वहीं पिथौरागढ़, बेरीनाग, गंगोलीहाट, दन्यां, लमगड़ा, शहरफाटक आदि क्षेत्रों को जाने वाले वाहनों और पर्यटकों को अल्मोड़ा शहर में आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इस मार्ग के बनने पर वाहन क्वारब, विश्वनाथ होते हुए सीधे पेटशाल से अपने गंतव्य को जा सकेंगे। इससे शहर के मार्गों में भी यतायात का दवाब कम होग। विधानसभा अध्यक्ष और क्षेत्रीय विधायक रघुनाथ सिंह चौहान ने सड़क का मुद्दा गत दिवस मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सम्मुख भी उठाया। लेकिन मुख्यमंत्री स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।