देवभूमि में ईमानदार लोग बसते हैं। उनकी सहायता के बदौलत ही हमें दोहरी जिंदगी मिली है। यह कहना है उज्जैन के तीर्थयात्री दल का। सोमवार को बदरीनाथ से निकाला गया दल देर शाम पालीटेक्निक स्थित राहत शिविर पहुंचा।
दल स्थानीय लोगों की सेवाभाव से अभिभूत नजर आया। उनका कहना है कि ऐसी भयंकर त्रासदी जीवन में पहली बार देखी है, मगर इसके बावजूद देवभूमि दोबारा आना चाहते हैं। मध्य प्रदेश में उज्जैन के पास किलोदा गांव से 24 लोगों का दल 6 जून को चार धाम यात्रा के लिए निकला था।
केदारनाथ यात्रा के बाद 15 जून को ये दल बदरीनाथ पहुंचा। दल के मुखिया बदरी प्रसाद वरगड़िया (62) ने बताया कि 16 जून को बदरीनाथ जी के दर्शन के बाद दोपहर में केवल इतना पता लगा कि सभी सड़कें बंद हो चुकी हैं।
स्थानीय निवासियों ने पूरी दल की मदद के लिए दरवाजे खोल दिए। रहने, खाने-पीने की व्यवस्था मुफ्त की गई। चार दिन बाद ही इस भयंकर आपदा की सूचना मिल पाई। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन ने जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई, वरना स्थितियां इतनी बदतर नहीं होती।
ओपी गामी ने बताया कि अन्य प्रदेशों की सरकारों ने अपने नागरिकों की मदद की लेकिन मप्र सरकार ने खैर-खबर लेना भी जरूरी नहीं समझा। पूरा दल तबाही के मंजर देख डरा हुआ है, मगर इसके बावजूद वह राज्यवासियों के व्यवहार से अभिभूत होकर दोबारा यहां आना चाहते हैं।