बदरीनाथ धाम में तैनात एक चिकित्सक को स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो बार सस्पेंड किया गया है। उक्त चिकित्सक द्वारा धाम में एक श्रद्धालु से पोस्टमार्टम करने के एवज में 20 हजार रुपये मांगने और आपदा के दौरान ड्यूटी से गायब रहने पर विभाग ने यह कार्रवाई की।
बीती 28 मई को बदरीनाथ धाम में आगरा से आए श्रद्धालु मुकेश शर्मा की सास की हृदय गति रुकने से मौत हो गई थी। बदरीनाथ में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक डा. सचिन राणा ने शव के पोस्टमार्टम करने के एवज में मृतका के परिजनों से 20 हजार रुपये की मांग की।
डाक्टर द्वार रुपयों की मांग करने पर श्रद्धालु मुकेश शर्मा ने इसकी शिकायत सीएमओ से की, लेकिन सीएमओ की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर मामले की जांच कर दोषी चिकित्सक को सस्पेंड करने की मांग की।
आयोग ने जिलाधिकारी को मामले में जांच को कहा, जिस पर सीएमओ की तीन सदस्यीय कमेटी ने धाम जाकर जांच शुरू की। लेकिन इससे पहले चिकित्सक बदरीनाथ छोड़कर भाग गया। मामले के बारे में पूछे जाने पर उक्त चिकित्सक द्वारा अपना पक्ष भी नहीं रखा गया।
जिस पर सीएमओ ने चिकित्सक के खिलाफ डीजी हेल्थ को अपनी रिपोर्ट भेज दी। जब चिकित्सक काफी समय से ड्यूटी पर नहीं पहुंचा तो सीएमओ ने 6 जून को उसे बदरीनाथ चिकित्सालय में तैनाती देने के निर्देश दिए, लेकिन चिकित्सक बदरीनाथ नहीं पहुंचा।
स्वास्थ्य महकमे ने किया सस्पेंड
इसी पर कार्रवाई कर सीएमओ ने तत्काल चिकित्सक को सस्पेंड कर दिया। जबकि अब जांच के उपरांत स्वास्थ्य महकमे ने भी बदरीनाथ धाम में शव सौंपने के एवज में श्रद्धालुओं से 20 हजार रुपए मांगने पर चिकित्सक को सस्पेंड कर दिया है।