उत्तराखंड में आसमान से बरसी आफत ने सब कुछ तहसनहस कर दिया। अपने डूबे घरों और खेतों को देख लोगों में निराशा तो है ही साथ ही प्रशासन के खिलाफ रोष भी है।
चारधाम की यात्रा पर आए श्रद्घालु निराशा के साथ वापस लौट रहे हैं। उन्हें जान बच जाने की खुशी तो है लेकिन दर्शन न कर पाने दुख भी। बारिश और बाढ़ से आई इस तबाही में अपना बहुत कुछ खो चुके लोगों ने बताई अमर उजाला को आपबीती।
पढ़िए: 'कल तक यहां मेरी रसोई थी'
मोथरोवाला में जहां कभी घर हुआ करते थे वहां कीचड़ के ढेर थे। मलबे के मालिक बने लोग उसमें से अपनी कमाई के अवशेष खोज रहे थे। इसी जगह थी वह महिला जो मातम में डूबे परिजनों और पड़ोसियों के बीच हंस रही थी। उसने हंसते हुए ही कहा कि कल तक यहां मेरी रसोई हुआ करती थी...बात पूरी नहीं हो पाई थी कि गला भर आया और आंखों में आंसू भी।
सरखेत क्षेत्र में भूस्खलन के चलते सड़कों पर मलबा पड़ा था। गांव के एक बुजुर्ग ने विनाश का मंजर दिखाया। उन्होंने बताया कि वह रात भर खिड़की के पास बैठकर नदी के तांडव को देखते रहे। उन्होंने कहा कि नदी चाहती तो सब ले जाती लेकिन उसने हम पर रहम किया है, कुछ छोड़ दिया है।
पढ़िए: 'नेताओं से कहना कि वोट मांगने न आएं'
बंजारावाला क्षेत्र में पुलिया पर खड़े लोग जलमग्न हुए घरों को देखकर अफसोस कर रहे थे। घरों की छतों से लोगों की करुण पुकार सुनाई दे रही थी। उनके घरों तक जाने वाली सड़क दरिया बन चुकी थी।
एक घर में युवक पानी निकालने की बेकार कोशिश कर रहा था और बुजुर्ग प्रशासन की व्यवस्था को कोस रहे थे।
वहीं एक रोते हुए व्यक्ति ने प्रार्थना की, 'मेरा घर डूब रहा है, मेरे मवेशी डूब रहे हैं। कोई नहीं आया...मैं क्या करुं...? और सिसकते हुए विनती की कि मेरे घर की एक फोटो ले लो...'। हर कोई अपनी घर की तस्वीर खिंचवाकर प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाना चाहता था।
पढ़िए: केदारनाथ्ा में रेल के डिब्बों की तरह बह रहे थे मकान
सोमवार की सुबह सात बजे होंगे.. अचानक भगदड़ मची.. करीब 22 लोग ऊपर के एक कमरे में घुस गए.. अचानक मकान रेल के डिब्बे की तरह चलने लगा। पानी का वेग इतना था कि पूरा मकान बह गया।.. चारधाम की यात्रा पर सात लोग निकले थे.. अब दो ही वापस जा रहे हैं, पांच कहां हैं कुछ पता नहीं।
यह बताते हुए नरेंद्र कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी दुर्गा देवी अग्रवाल की आंखें भर आई। सूखे गले से बाढ़ की विभिषिका के शब्द निकलते-निकलते अटक रहे थे।
पढ़िए: 'मन में बदरी विशाल के दर्शन की टीस रह गई'
तीन दिन की भारी बारिश ने आमजन से लेकर चारधाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आए हजारों यात्रियों को बेहाल कर दिया है। यात्री अब सकुशल घर लौटने की भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं।
यात्रियों में इस त्रासदी से बच निकलने की खुशी भी है लेकिन बदरीनाथ धाम के दर्शन न कर पाने का दुख भी। बदरीनाथ दर्शन के लिए लंबी दूरी तय करने के बाद कोई चार किलोमीटर दूरी से वापस आया तो कोई आधे रास्ते से। अपने इन्हीं मनोभावों को मन में समेटे अब सुरक्षित घर लौटने की कामना कर रहे हैं यात्री।
पढ़िए: बिंदाल नदी में बहा देहरादून का पिज्जा ब्वॉय
इस मानसूनी कहर में पिज्जा सेंटर का एक कर्मी बिंदाल नदी के तेज बहाव में बह गया। वहीं, कावंली रोड पर बिंदाल के सामानांतर बहने वाले एक नाले के किनारे मनप्रीत का पांव फिसल गया और वह उफनाते नाले में गिर गया। उसे बचाने के लिए लोगों ने शोर किया, लेकिन थोड़ी ही देर में मनप्रीत बिंदाल नदी में पहुंच गया और लोगों को दिखना बंद हो गया।