छोटे से कान्हा अपने ही घर में 'कर' के बोझ से दबे हैं। जबकि पड़ोसी राज्य राजस्थान और गुजरात ने भक्तों की भावना को देखते हुए कन्हैया की मूर्तियों को कर से मुक्त कर रखा है।
ऐसे में ब्रज के कारोबारियों को बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
कान्हा की मूर्तियों पर पांच प्रतिशत वैट लगा है। हालांकि इससे पूर्व वर्ष 2001 से 2009 तक इन मूर्तियों पर वैट का प्रतिशत शून्य था।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पूर्व ही लड्डू गोपाल की मूर्तियों का कारोबार परवान चढ़ने लगता है। ब्रज के हाथरस, अलीगढ़, इगलास के आसपास के क्षेत्रों में तैयार बाल गोपाल की मूर्तियों की देश भर में मांग है।
कारीगरों के हुनर और ब्रज में तैयार लड्डू गोपाल की मांग भावनाओं से भी जुड़ी है। दुखद बात ये है इन भावनाओं पर सरकारी कर व्यवस्था भारी पड़ रही है।
पूजा सामग्री के व्यापारी अजय गोयल ने बताया कि ब्रज में पूजा सामग्री का कारोबार व्यावसायिक के साथ ही भावनाओं से जुड़ा है। ऐसे में सरकार को इस सामग्री को वैट मुक्त कर देना चाहिए। ताकि ब्रज में तैयार मूर्तियां देश-विदेशों में पहुंचकर लोगों की भावनाओं का केंद्र बन सकें।