अमेरिकी विद्वान मार्क ट्वेन ने लिखा है कि काशी इतिहास से पुरातन और परंपराओं से भी पुरानी नगरी है। यहां लोग व्रत-त्योहारों, आस्था के प्रतीक मेलों को जीकर किस तरह धन्य होते हैं इसकी बानगी शुक्रवार को देखने को मिली। कुंड पर जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर सजा लोकोत्सव यादगार बन गया। ढोल-नगाड़े, ताशे के साथ कुंड पर पहुंचीं व्रतियों ने मां पार्वती के रूप में जीवित्पुत्रिका की सविधि पूजा की और मेला लग गया। गंगा तट से लेकर शहर के बाहरी इलाकों में सड़कों की पटरियां भी वेदियों पर हल्दी-चंदन, रोली के टीकों से पुत्रों के दीर्घायु जीवन की अभ्यर्थना में सज गईं।
लक्ष्मी कुंड पर शुक्रवार को अन्न-धन-ऐश्वर्य के प्रतीक सोरहिया मेले के संकल्पों के तहत बांधे गए 16 गांठ के धागों को खोला गया तो दूसरी ओर पुत्र कामना के जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए उमड़ी व्रतियों की भीड़ से एक दूसरा मेला गुलजार हो गया। वेदियां बनाकर पुत्रों के दीर्घायु जीवन के लिए मां पार्वती की सविधि आराधना की गई। इसके लिए कुंड से लेकर गुरुबाग-लक्सा के बीच सड़कों तक सैलाब उमड़ पड़ा।
दोपहर बाद ही सिर पर दउरी में जलते हुए घी के दीप, पूजा, प्रसाद और तरह-तरह के पकवान, फल, फूल लिए व्रतियों के परिजन घरों से निकले। बाजे गाजे के साथ घर-घर से महिलाएं सज-धज कर निकलीं। दिन के 12 बजे तक लक्ष्मीकुंड पैक हो गया। व्रतियों ने वेदी के लिए जगह पक्की कर ली।
व्रतियों के साथ उनके परिवारीजन और रिश्तेदार भी पुण्य बटोरने पहुंचे थे। कुंड पर जगह नहीं मिली तो महिलाएं लक्सा थाने के सामने पार्क में वेदियां बनाने लगीं। शाम तीन बजे तक लक्सा, जद्दूमंडी और गुरुबाग की सड़कों के बीच व्रतियों की वेदियां और गन्ने के मंडप नजर आने लगे। सड़क पर व्रतियों की भीड़ को देखते हुए गोदौलिया से रथयात्रा के बीच वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। गीता मंदिर गेट से लक्ष्मीकुंड जाने वाली सड़क भी व्रतियों की भीड़ से खचाखच भरी रही। चांदी के चंद्रमा के रूप में जिउतिया को धागे में गूंथ कर पूजा गया। इसके बाद आठ आठ प्रकार के फल, फूल, व्यंजन वेदियों पर अर्पित किए गए। व्रती महिलाओं ने आठ-आठ कहानियां भी सुनीं। कहानी सुनाने के लिए बुजुर्ग महिलाएं अलग-अलग समूहों में पहुंची थीं। इसके अलावा मंडुआडीह, बउलिया, नगवा, ईश्वरगंगी पोखरा पर भी जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजा करने के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ी थी। पूजास्थलों पर तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी।
पुत्र की दीर्घायु की कामना से महिलाओं ने शुक्रवार को निर्जल व्रत रखकर जिउतिया माता का पूजन किया। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, पोखरों के किनारे पूजन के लिए दिन भर व्रती महिलाओं का जमावड़ा लगा रहा। वहीं, फल-फूल और पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में भी खासी भीड़ रही। चौबेपुर क्षेत्र के सोनबरसा, चौबेपुर, अजांव, डुबकिया, कैथी, गौराउपरवार, बहादुरपुर, चंद्रावती, ढकवा, रामपुर, गरथौली, मठिया, धौरहरा, राजवारी, भगतुआ, जाल्हूपुर, मुनारी, बर्थरा खुर्द, हरिहरपुर और उमरहां में नाचते-गाते महिलाएं तालाबों के किनारें सज धजकर नाचते-गाते पहुंची और विधि विधान से जिउतिया का पूजन किया। रोहनिया क्षेत्र में भी महिलाओं ने मां जीवितपुत्रिका का व्रत रखकर पूजन किया।
मिर्जामुराद के गौर ग्राम, बगलाचट्टी स्थित शिव मंदिर, चक्रपानपुर, प्रतापपुर, अषाढ़, बेनीपुर, कल्लीपुर, मेंहदीगंज, खजुरी, रखौना, पिलोरी, राजपुर, डंगहरिया, लच्छापुर, निगतपुर आदि गांवों में शिवालयों एवं जलाशयों के किनारे पूजन के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। बड़ागांव स्थित रामनगर के शिव मंदिर, बसनी के चौरामाता मंदिर, चंद्रिका मंदिर, बिरांव, कविरामपुर, ताड़ी, साधोगंज, चिलबिला, कूड़ी, अनेई और भीटी में भी जीवित्पुत्रिका का पूजन किया गया। इसी तरह हरहुआ के नरायनपुर, गड़वा, काजीसराय, हरहुआ, कोइराजपुर, भगतूपुर, सिहापुर, भटौली, गोकुलपुर ओसानपुर, बेरवा, वाजिदपुर आदि गांवों में भी जिउतिया पूजन को लेकर खासी रौनक रही।