चिड़ियाघर में रहने वाली हाथी के तनाव का स्तर जंगली हाथियों से ज्यादा होता है। चिड़ियाघर में हाथियों के अंदर अपेक्षाकृत ज्यादा स्ट्रेस हॉर्मोन पाया गया है। ये बातें बीएचयू में पहुंचे इंडियन इंस्टीट्यूट साइंसेज बंगलूरू आईआईएसी के (नेशनल साइंस चेयर और वाइल्ड लाइफ) एक्सपर्ट प्रो. रमन सुकुमार ने कहीं। बीएचयू के महामना सभागार में 25वें एसपी रे चौधरी मेमोरियल लेक्चर में उन्होंने कहा कि जीनोम सीक्वेसिंग कर पता लगाया गया कि विश्व के 60 फीसदी हाथी भारत में ही पाए जाते हैं।
उन्होंने कहा, उत्तर से ही दक्षिण की ओर हाथियों का पलायन हुआ है। ये भी जानकारी मिली है कि भारत में हाथियों के कुल पांच विशिष्ट लीनीएज पाए जाते हैं। बीते 45 वर्षों में हाथी और मानव का टकराव कम से कम 4 गुना बढ़ गया है। इसका प्रमुख कारण पर्यावरण में बदलाव, शहरीकरण, औद्योगीकरण है। हालांकि इसके बावजूद भी हाथियों की संख्या 15000 से बढ़कर 30000 हो गई है। जो उनको अपने इलाके यानी कि जंगल से बाहर निकलने को बाध्य कर रही है और मानव के साथ एनकाउंटर को बढ़ावा दे रही है।
मानवों के साथ संघर्ष में नर की ज्यादा भूमिका
प्रो. सुकुमार ने बताया कि नर हाथी ज्यादा ताकतवर होता है, ऐसे में मानवों के साथ संघर्ष में नर की ज्यादा भूमिका है। हाथी-मनुष्य का संबंध सदियों पुराना है, जिसमें यह मनुष्य को तय करना है कि वह कैसे उनके प्राकृतिक वास को सुरक्षित रखता है। हाथियों का रेंज इसलिए फैल रहा, क्योंकि उनकी आदतों में बदलाव हो रहा है। इसकी वजह से हाथियों का मानव के साथ आमना-सामना बढ़ता जा रहा है।
200 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र हुए पब्लिश
संस्था की सचिव प्रो. मधु तापड़िया ने कहा कि प्रो. रमन सुकुमार एशियाई हाथियों की इकोलॉजी, बिहेवियर और कंजर्वेशन पर अपने अग्रणी शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। 1992 में शुरू की गई देश की प्रमुख कांजेर्वेशन, प्रोजेक्ट एलिफेंट के प्रमुख कर्ताधर्ता थे। वह 1997-2004 के दौरान एशियाई हाथी विशेषज्ञ समूह के अध्यक्ष थे। पिछले एक दशक से वह राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। प्रो. सुकुमार के 200 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।