सिर में लगी गोली से घायल अजय को तुरंत लेकर पास के एक निजी चिकित्सालय गए, जहां से जवाब मिलने बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। बीएचयू पहुंचते ही अजय ने दम तोड़ दिया। इसी बीच डायल-112 पर सूचना पाकर शिवपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार फोर्स संग मौके पर पहुंचे, फोरेंसिक टीम ने हुक्का बार के अंदर और बरामदे से कई सामान साक्ष्य के तौर पर इकट्ठा किया। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही मां उर्मिला देवी और दो बहनें ज्योति व प्रीति बेसुध हो गईं।
पुलिस की पूछताछ में पिता भरतलाल ने बताया कि हुक्का बार संचालन के लिए अजय ने कुछ लोगों से ब्याज पर कर्ज ले रखा था। उसी सिलसिले में आए दिन कर्जदारों का तगादा हो रहा था। सोमवार शाम में भी कुछ युवक आए थे और अजय से विवाद हुआ था। इस संबंध में कैंट एसीपी रत्नेश्वर सिंह ने बताया कि भाई अक्षय की तहरीर पर टकटकपुर निवासी उमेश पटेल और मोहित सहित एक अज्ञात युवती के खिलाफ हत्या सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस की दो टीमें गठित की गई हैं।
नवलपुर स्थित एक लॉन के पास संचालित हुक्का बार में कई तरह के गलत काम भी होते थे। यह बातें आसपास के लोगों ने घटना के बाद कहना शुरू कर दिया। आसपास के लोगों के अनुसार नए उम्र के लड़के और लड़कियों की आवाजाही हुक्का बार में होती थी। दिन हो रात, हुक्का बार गुलजार रहता था। कई बार मारपीट की घटनाएं भी हुक्का बार के अंदर और बाहर हो चुकीं थीं। इसकी सूचना भी स्थानीय चौकी और पुलिस थाने को दी गई थी।
केस-1: बेलवरिया निवासी सर्वेश ने सूदखोरों की प्रताड़ना से आजिज आकर छह जनवरी को शिवपुर क्षेत्र के भगवानपुर में ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी।
गंगा में छलांग लगाकर व्यापारी ने दी थी जान
केस-2: सूदखोरों के उत्पीड़न से आजिज आकर अगस्त 2019 में चितईपुर क्षेत्र की विश्वकर्मा नगर कॉलोनी निवासी व्यापारी ने शास्त्री पुल से गंगा में छलांग लगा दी थी। व्यापारी ने सुसाइड नोट में लिखा था कि तीन सूदखोरों के कारण आत्महत्या कर रहा हूं। सूदखोर हर महीने 40 प्रतिशत ब्याज लेता था। चार लाख की जगह 40 लाख दे चुका, लेकिन कर्ज खत्म ही नहीं हो रहा है। ऊपर से सूदखोर घर और दुकान आकर अलग से बेइज्जत करता है।
केस-3: अक्तूबर 2015 में हुकुलगंज निवासी पान के थोक व्यवसायी ने सूदखोरों से आजिज आकर राजघाट पुल से गंगा में छलांग लगा कर जान दे दी थी। आत्महत्या से पहले अपने करीबियों से व्यापारी का यही कहना था कि मूलधन कबका खत्म हो गया, लेकिन सूदखोर को ब्याज देकर और आए दिन उससे अपमानित होकर वह आजिज आ गया है। इस वजह से अब उसके सामने मौत के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।
जहर खाकर किया था आत्महत्या का प्रयास
केस-4: वर्ष 2020 के आखिरी में लोहता के सूदखोर से आजिज आकर डीरेका के एक कर्मचारी ने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया था। कर्मचारी का कहना था कि उसने एक जरूरी काम के लिए 15% ब्याज दर पर पैसा उधार लिया था। इसी बीच परिजनों की तबीयत खराब होने पर वह चार माह की किश्त नहीं दे पाया तो सूदखोर उसका जीना दूभर कर दिया था। अंतत: जब उसे लगा कि अब इज्जत नहीं बचेगी तो उसने जान देने का प्रयास किया था।