व्योमेश शुक्ल ने बताया कि किस तरह सभा ने अदालतों में हिंदी भाषा को उसका जायज हक दिलाने के लिए ऐतिहासिक आंदोलन चलाया। इसके अलावा, उन्होंने देश के कोने-कोने से हस्तलिखित हिंदी ग्रंथों की खोज के अभियान, हिंदी शब्दकोश के वृहद निर्माण, रामचरितमानस के सबसे प्रामाणिक संस्करण के ऐतिहासिक प्रकाशन के साथ-साथ कबीर, सूर, जायसी और भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे कालजयी साहित्यकारों की ग्रंथावलियों के प्रकाशन से जुड़ी जानकारियां दीं।
आधुनिक और तकनीकी गुर सीख रहे देश के युवा : इंटर्नशिप कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय, बीएचयू, डीएवी पीजी कॉलेज, आर्य महिला पीजी कॉलेज और यूपी कॉलेज के छात्र-छात्राएं शामिल हुए हैं। इन सभी प्रशिक्षुओं को उनकी रुचि और योग्यता के आधार पर सात विशेष वर्किंग ग्रुप्स में बांटा गया है।
इस दौरान युवाओं को पारंपरिक पुस्तकालय प्रबंधन के साथ-साथ आधुनिक विधाओं जैसे कैटलॉगिंग, प्राचीन दस्तावेजों की स्कैनिंग, दुर्लभ पत्रिकाओं के निरीक्षण, अंग्रेजी पुस्तकों की सूची तैयार करने, पुस्तक-प्रकाशन की बारीकियों और आज के दौर के सबसे जरूरी सोशल मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।