गंगा-वरुणा और गोमती तीन नदियों के किनारे बसी काशी प्यासी है। गर्मी के दिनों में जब आसमान से आग बरस रही हो और घर में पीने का साफ पानी न हो, 25-50 परिवारों के लिए राहत का सबब बने किसी एक नल से पानी लेने के लिए तड़कती धूप में लंबी लाइन लगानी पड़ती हो तो दिल पर क्या गुजरेगी, यह आसानी से समझा जा सकता है।
सीएम योगी आदित्यनाथ के पहली बार काशी आगमन पर यहां की जनता को उम्मीद है कि जनहित में सख्त फैसले लेने वाले सीएम उनकी गुहार सुनेंगे और उनकी पीड़ा समझेंगे। सुविधाएं-संसाधन सब हैं, करोड़ों रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं।
बस जरूरत है दृढ़ निश्चय के साथ योजनाओं के क्रियान्यवन की ताकि प्यासी जनता को राहत मिले और शहर में बुनियादी सुविधाओं का विकास हो। हाल ही में बुंदेलखंड दौरे पर पहुंचे सीएम ने कहा था कि अब प्रदेश का कोई भी जिला प्यासा नहीं रहेगा।
यह बात उन्होंने ट्वीट भी की थी। इससे काशी की जनता सीएम की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। यहां के लोगों को जल संकट से निजात दिलाने की जनाकांक्षा और प्रबल हुई है।
गंगा किनारे बसी काशी में 65 फीसदी बाशिंदे शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। ये हालात तब हैं जब यहां पेयजल परियोजना पर करोड़ांे रुपये खर्च किए जा चुके हैं। रकम पानी की तरह बह गई लेकिन इस परियोजना से अब तक एक बूंद पानी घरों तक नहीं पहुंचा है।
जबकि, इस परियोजना को शुरू हुए नौ साल से अधिक हो चुके हैं। 694 किलोमीटर पेयजल पाइप लाइन बिछाई तो गई लेकिन उसे अब तक चालू नहीं कराया जा सका। 40 नए ओवरहेड टैंक पर भी करोड़ांे रुपये खर्च किए गए लेकिन टेस्टिंग में ही ये फेल हो गए।
अब इनके निर्माण में मानक आैर गुणवत्ता की अनदेखी की जांच टीएसी से कराई जा रही है। ये काम सही तरीके से कराए गए होते तो अब तक उनका लाभ जनता को मिल गया होता तो पेयजल की समस्या काफी हद तक हल हो गई होती लेकिन जनता का इंतजार कब खत्म होगा, कोई बताने वाला नहीं।
हालात इस कदर खराब हैं कि शहर को रोजाना 276 एमएलडी पानी की जरूरत है पर केवल140 एमएलडी पानी मिल रहा है।