जिन किसानों ने खेती के लिए बैंक या अन्य बैंकिंग संस्था से फसली ऋण लिया है उन्हें बैंकों द्वारा नोटिस जारी न करने के प्रदेश सरकार के फैसले से कर्ज में डूबे किसानों को बड़ी राहत मिली है। इससे किसानों ने राहत की सांस ली है।
किसानों का कहना है कि बैंकों की ओर से नोटिस और धन जमा करने का दबाव बनाया जाता है। कम से कम सरकार के इस निर्णय से राहत होगी। यह फैसला तब आया है जब धान की नर्सरी लगाई जा रही है जिसके लिए धान का बीज, खाद और उसके रख-रखाव से जुड़े तमाम खर्चों का बोझ किसानों के सिर पर है।
वाराणसी में एक लाख किसानों पर बैंकों का कर्ज है। एक आकलन के अनुसार लगभग चार सौ करोड़ रुपये का कर्ज किसानों पर है। इसको लेकर बैंक अक्सर किसानों को नोटिस जारी करते रहते है। जिन किसानों के पास कर्ज लौटाने का पैसा नही होता उनके लिए यह नोटिस कभी-कभी काल बन जाता है।
ऐसे मौके पर योगी सरकार का यह फैसला राहत देने वाला है। चौबेपुर क्षेत्र के टाड़ गांव के किसान गुलाब यादव यूनियन बैंक से खेती के लिए तीन लाख रुपये का बैंक लोन लिए है। खेती अच्छी नहीं होने के कारण उसे अब तक चुकता नहीं कर सके हैं।
बैंकों की ओर से लगातार दबाव के कारण उलझन में रहना पड़ता है। चौबेपुर के ही अजाव गांव के लालचंद्र धौरहरा स्थित यूनियन बैंक से तीन लाख रुपये का लोन लिया है। वहीं चोलापुर के इमिलिया गांव के शिवशंकर सिंह एसबीआई से 95 हजार और जटाशंकर सिंह ने इसी बैंक से 40 हजार रुपये का बैंक लोन खेती के लिए लिया है।
कर्ज अदा करने की चिंता बनी रहती है। यूनियन बैंक के एलडीएम प्रभात सिन्हा ने बताया कि मार्च के बाद से किसानों को नोटिस जारी नही की जा रही है।