सूबे की योगी सरकार ने एआरटीओ आरएस यादव मामले में किसी तरह की नरमी न बरतने के संकेत दिए हैं। मंगलवार को लखनऊ में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में आरएस यादव पर अब तक हुई कार्रवाई पर चर्चा हुई।
साथ ही, परिवहन विभाग में भ्रष्टाचारियों के गठजोड़ की समानांतर व्यवस्था को खत्म करने के लिए सरकार के जीरो टॉलरेंस के रुख की जानकारी दी गई। सूत्रों का दावा है कि आरएस के साथ ही काली कमाई करने वाले कई और अधिकारी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
दरअसल, पूर्ववर्ती सरकारों में परिवहन विभाग में भ्रष्टाचारियों के गठजोड़ की समानांतर व्यवस्था चलती रही है। आरएस यादव इसी व्यवस्था की एक कड़ी है। सरकार अब आरएस के जरिए इस गठजोड़ को तोड़ने की तैयारी में है।
आने वाले दिनों में परिवहन विभाग में कुछ और बड़ी कार्रवाइयां सामने आ सकती हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक शासन स्तर पर तय हुआ हैै कि आरएस के विरुद्ध सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय के साथ ऐसी कार्रवाई हो कि वह प्रदेश में भ्रष्टाचारियों के लिए नजीर बने।
इससे आरएस के बचाव में पिछले तीन दिनों से लखनऊ में चल रहे उसके करीबियों के प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। न सिर्फ मंत्री बल्कि नौकरशाहों में भी कोई उनकी पैरवी सुनने को तैयार नहीं है।
नामी-बेनामी संपत्ति पर आयकर की पैनी नजर
भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे गए चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की नामी-बेनामी संपत्तियों पर आयकर की पैनी नजर है। आयकर के अधिकारियों को आशंका है कि आरएस की ऐसी संपत्तियां देश ही नहीं, विदेशों में भी हो सकती हैं। लिहाजा, पूरा विवरण जुटाकर विस्तृत छानबीन के बाद कार्रवाई की जाएगी।
अब तक जिन संपत्तियों के बारे में जानकारी हासिल हुई है, उनका ब्योरा खंगाला जा रहा है। गोरखपुर, वाराणसी, चंदौैली, भदोही, लखनऊ और नोएडा सहित अन्य स्थानों पर आरएस की संपत्तियों के बारे में अब तक जानकारियां सामने आई हैं।
आयकर विभाग उनका विवरण तैयार करने में जुटा है। विभाग किसी भी तरह जल्दबाजी में नहीं है। विभागीय उच्चाधिकारियों का कहना है कि आरएस की नामी-बेनामी चल और अचल संपत्तियों पर नजर रखी जा रही है। उच्चाधिकारियोें के निर्देशन में पूरी पड़ताल के बाद अगला कदम उठाया जाएगा।