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बीएचयू अस्पतालः ऑपरेशन के बाद मरीजों की मौत मामले की जांच को पहुंची केंद्रीय टीम

Wed, 14 Jun 2017 11:05 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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सर सुंदरलाल अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में सात जून को ऑपरेशन के बाद तीन मरीजों की मौत का मामला गरमाता जा रहा है। मंगलवार को दवाओं की गुणवत्ता जांचने ड्रग विभाग की टीम के पहुंचने से अस्पताल में हड़कंप मचा रहा।
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टीम के सदस्यों ने यहां उमंग फार्मेसी पर दवाओं का सैंपल लेने के साथ ही चिकित्सकों से पूछताछ की। लंका के पास की दुकानों से भी दवाओं का नमूना लिया। अस्पताल के आपरेशन थिएटर में सात जून को 24 घंटे के भीतर तीन मरीजों की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन सकते में है।

नाइट्रस आक्सीजन और आईसोफ्लोरेन इंजेक्शन के ओवरडोज, गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए इसे सील करा दिया गया है लेकिन अभी तक सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। इस बीच ड्रग कंट्रोलर के नेतृत्व में केंद्रीय टीम मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे अस्पताल पहुंची।
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यहां उन्होंने उमंग फार्मेसी पर कुछ दवाओं का सैंपल भी लिया। इस दौरान सदस्यों ने पिछले दिनों दवाओं की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करने वाले कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. ओमशंकर से भी पूछताछ की।

डॉ. ओमशंकर ने बताया कि करीब दो घंटे तक उन्होंने सदस्यों को अक्टूबर में उमंग फार्मेसी पर एंजियोप्लास्टी की सील टूटे दवाओं की बिक्री के बारे में बताया। साथ ही उस समय सील पैक को भी खुलवाया गया। बताया कि महंगी दर पर बेची जाने वाली दवा की शिकायत पर तीन सदस्यीय कमेटी बनी, जिसमें वह खुद भी थे।

इस पर चिकित्सा अधीक्षक ने विस्तृत जांच कराकर रिपोर्ट की बात कही थी लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट नहीं आई। इस दौरान टीम के सदस्यों ने नाइट्रस ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के लखनऊ और इलाहाबाद स्थित कार्यालय पर भी छापेमारी कर कागजातों की जांच की।

उधर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने बताया कि दवाओं की गुणवत्ता की जांच करने ड्रग कंट्रोलर के नेतृत्व में टीम ने जांच कर नमूना लिया। इसके अलावा लंका के दुकानों में भी जांच की गई।
 
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एक्स-रे न होने से नाराज मरीजों का हंगामा

बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में मंगलवार को ओपीडी में एक्स-रे न होने से नाराज मरीजों ने हंगामा किया। मरीजों और तीमारदारों का कर्मचारियों और बाहर गेट पर खड़े सुरक्षा गार्डों से नोकझोंक भी हुई। करीब 20 मरीजों के परिजन सेंटर के पांचवें तल पर स्थित प्रोफेसर इंचार्ज से शिकायत करने पहुंचे लेकिन अधिकारियों से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। 

सुबह नौ बजे एक्सरे कराने की रसीद और पर्चा जमा करने के बाद लोग इंतजार करते रहे। दोपहर 12 बजे तक एक्सरे शुरू नहीं हुआ तो लोगों ने पूछताछ की। पता चला कि इमरजेंसी छोड़ ओपीडी वालों का एक्सरे नहीं होगा। इस पर मरीज और तीमारदार हंगामा करने लगे।

कुछ लोगों ने फीस वापस मांगी तो कुछ निराश लौट गए। बता दें कि यहां इमरजेंसी के अलावा ओपीडी में 100 से अधिक मरीजों का एक्सरे भी होता है। मामले में ट्रॉमा सेंटर के  इंचार्ज प्रो. संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि  रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते समस्या हो रही है।

खाली पदों पर भर्ती के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा जा चुका है। मंगलवार को हड्डी रोग के मरीजों की संख्या अधिक रहती है। दो ही टेकनीशियन थे, जिससे ओपीडी की जांच नहीं हो पाई। बुधवार को सभी की जांचें कराई जाएंगी।
 
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